वॉशिंगटन/अस्मारा: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में ईरान और अमेरिका के बीच गहराते तनाव ने दुनिया को एक बड़े युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। इस अशांति के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी कूटनीति की बिसात बिछाते हुए एक बड़ा ‘बैकअप प्लान’ तैयार किया है। ट्रंप अब अफ्रीकी देश इरिट्रिया के साथ रिश्तों की जमी हुई बर्फ को पिघलाने की तैयारी में हैं। कभी प्रतिबंधों की मार झेलने वाले इस छोटे से देश की तरफ हाथ बढ़ाकर ट्रंप न केवल ईरान को रणनीतिक रूप से घेरना चाहते हैं, बल्कि लाल सागर (Red Sea) में बढ़ते चीनी प्रभाव को भी कड़ी चुनौती देने के मूड में हैं।
लाल सागर की भौगोलिक स्थिति: क्यों खास है इरिट्रिया?
इरिट्रिया भले ही एक छोटा अफ्रीकी देश हो, लेकिन इसकी भौगोलिक स्थिति इसे ‘ग्लोबल पावर गेम’ का केंद्र बना देती है। पूर्वी अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र में स्थित इस देश की लगभग 700 मील से लंबी सीमा लाल सागर (Red Sea) से सटी हुई है। इसके पड़ोस में जिबूती, इथियोपिया और सूडान जैसे देश हैं। रणनीतिक रूप से यह क्षेत्र दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि अगर लाल सागर पर अपना प्रभाव बढ़ाना है, तो इरिट्रिया से बेहतर साझेदार कोई और नहीं हो सकता।
ईरान और हूतियों के खिलाफ ट्रंप की ‘बैकअप स्ट्रैटेजी’
ईरान ने लंबे समय से ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ पर अपना दबदबा बना रखा है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति में बाधा आने का डर बना रहता है। वहीं, यमन में सक्रिय हूती विद्रोही लगातार रेड सी और ‘बाब अल-मंडेब स्ट्रेट’ को बंद करने की धमकियां देते रहते हैं। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप को डर है कि यदि मुख्य मार्ग बंद हुए, तो अमेरिकी हितों को भारी नुकसान होगा। इसी के जवाब में ट्रंप अब इरिट्रिया पर लगे पुराने ट्रैवल बैन और अन्य प्रतिबंधों को हटाकर उसे अपना सहयोगी बनाना चाहते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर रेड सी में सैन्य और सामरिक पकड़ मजबूत बनी रहे।
चीन की ‘कर्ज नीति’ और जिबूती सैन्य बेस पर नजर
इरिट्रिया की ओर बढ़ते अमेरिकी कदम के पीछे चीन भी एक बड़ी वजह है। चीन पिछले एक दशक से अफ्रीकी देशों को भारी कर्ज देकर अपने जाल में फंसा रहा है। साल 2017 में चीन ने जिबूती में अपना पहला विदेशी सैन्य बेस बनाकर दुनिया को चौंका दिया था। जिबूती बिल्कुल रेड सी के मुहाने पर स्थित है। चीन अब सस्ते लोन और हथियारों के जरिए अन्य अफ्रीकी देशों में भी पैठ बना रहा है। ट्रंप प्रशासन की रणनीति अब चीन के इस ‘ओवरसीज विस्तार’ को रोकने की है, जिसके लिए इरिट्रिया को पाले में लाना बेहद जरूरी हो गया है।
प्रतिबंधों से राहत की उम्मीद, बदलेगी ग्लोबल कूटनीति
पिछले साल तक जिन 19 ‘चिंताजनक देशों’ की सूची में अमेरिका ने इरिट्रिया को रखा था, अब वहां से प्रतिबंध हटाने की सुगबुगाहट तेज है। ग्रीन कार्ड और आव्रजन संबंधी आवेदनों पर लगी रोक में ढील देकर ट्रंप प्रशासन इरिट्रिया को बड़ा संदेश देना चाहता है। जानकारों का मानना है कि यदि ट्रंप का यह दांव सफल रहता है, तो मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के जंक्शन पर अमेरिका की शक्ति कई गुना बढ़ जाएगी, जो ईरान और चीन दोनों के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकती है।
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