
अमेरिका की सख्त निगरानी और कथित नाकाबंदी के माहौल में चीन ने एक बार फिर वैश्विक रणनीति में बड़ा संकेत दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक चीनी तेल टैंकर ने संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत ठप पड़ती दिख रही है।
होर्मुज पार कर चीन ने दिया संकेत
रिपोर्ट के अनुसार, चीनी टैंकर का होर्मुज जलडमरूमध्य पार करना केवल एक सामान्य समुद्री गतिविधि नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे अमेरिका के दबाव के खिलाफ एक रणनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। यह वही इलाका है जहां से दुनिया के बड़े हिस्से की तेल आपूर्ति गुजरती है और जिस पर लंबे समय से भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है।विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से चीन यह दिखाना चाहता है कि वह ऊर्जा आपूर्ति को लेकर किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।
ईरान का प्रस्ताव, अमेरिका की सख्ती
इसी बीच परमाणु मुद्दे पर ईरान और अमेरिका के बीच मतभेद और गहराते नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को 5 साल तक रोकने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, अमेरिका इस अवधि को बढ़ाकर 20 साल करने की मांग पर अड़ा हुआ है।इस बड़े अंतर के चलते दोनों देशों के बीच किसी समझौते की संभावना फिलहाल कमजोर होती दिख रही है।
बढ़ता तनाव, वैश्विक असर की आशंका
चीन के इस कदम और ईरान-अमेरिका के बीच जारी तनातनी का असर वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है। खासतौर पर तेल की कीमतों और सप्लाई चेन पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल सकता है।विश्लेषकों का कहना है कि अगर स्थिति और बिगड़ती है, तो इसका असर न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
क्या आगे बढ़ेगा टकराव?
मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में अमेरिका, चीन और ईरान के बीच रणनीतिक टकराव और तेज हो सकता है। जहां एक तरफ चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने में जुटा है, वहीं अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त नियंत्रण चाहता है।अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक बातचीत से कोई समाधान निकलता है या यह विवाद और गहराता है।
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