
भारत की टेक्नोलॉजी यात्रा में एक ऐतिहासिक पड़ाव जल्द ही दर्ज हो सकता है। एआई समिट 2026 के मंच से बड़ा ऐलान करते हुए केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संकेत दिया कि देश में पहला कमर्शियल सेमीकंडक्टर चिप प्रोडक्शन फरवरी के अंत तक शुरू हो सकता है। यदि सब कुछ तय समय पर रहा तो भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा जो बड़े पैमाने पर चिप निर्माण करते हैं।
सेमीकंडक्टर मिशन को मिली रफ्तार
सरकार के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन को अब जमीन पर मूर्त रूप मिलता दिख रहा है। लंबे समय से जिस स्वदेशी चिप निर्माण क्षमता पर काम चल रहा था, वह अब उत्पादन चरण में प्रवेश करने के करीब है। मंत्री ने कहा कि देश में अत्याधुनिक फैब्रिकेशन यूनिट्स तेजी से तैयार की जा रही हैं और शुरुआती चरण में कमर्शियल चिप्स का उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा। इससे मोबाइल, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और डिफेंस सेक्टर को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।
एआई और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को मिलेगा बूस्ट
एआई समिट में यह भी स्पष्ट किया गया कि सेमीकंडक्टर निर्माण सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, 5G-6G नेटवर्क और सुपरकंप्यूटिंग जैसी उभरती तकनीकों के लिए भी आधार तैयार करेगा। वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भागीदारी बढ़ेगी और विदेशी निवेश को भी नई दिशा मिलेगी।
युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर
सरकार का दावा है कि चिप मैन्युफैक्चरिंग की शुरुआत से हजारों प्रत्यक्ष और लाखों अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। इंजीनियरिंग, रिसर्च, डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े युवाओं को देश में ही अवसर मिलेंगे। इससे “मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” अभियानों को भी मजबूती मिलेगी।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की एंट्री
अब तक सेमीकंडक्टर उत्पादन में कुछ ही देशों का दबदबा रहा है। ऐसे में भारत का इस क्षेत्र में कमर्शियल स्तर पर प्रवेश रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि यह कदम भारत को टेक्नोलॉजी महाशक्ति बनने की दिशा में मजबूत आधार देगा।
क्या बदल जाएगा फरवरी के बाद?
यदि फरवरी के अंत तक उत्पादन शुरू होता है तो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की लागत में कमी, सप्लाई चेन में स्थिरता और आयात पर निर्भरता में गिरावट जैसे बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। आने वाले महीनों में सरकार की ओर से उत्पादन इकाइयों, निवेश और तकनीकी साझेदारियों को लेकर और भी घोषणाएं संभव हैं।
भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण की यह शुरुआत न सिर्फ तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर कदम है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की नई पहचान गढ़ने की दिशा में भी बड़ा संकेत है।
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