नॉर्वे दौरे के बाद फिर गरमाई बहस, पीएम मोदी के विदेशी दौरों पर उठे सवालों को लेकर सरकार ने दिया बड़ा जवाब

नॉर्वे दौरे के दौरान प्रेस फ्रीडम को लेकर उठे सवालों ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेशी दौरों को अंतरराष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। वैश्विक मंचों पर भारत की लोकतांत्रिक छवि, मीडिया की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर विदेशी मीडिया तथा कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा की जा रही टिप्पणियों के बाद राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि केंद्र सरकार ने इन आलोचनाओं को भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत के खिलाफ बनाया जा रहा एक नैरेटिव करार दिया है।

रणनीतिक उपलब्धियों पर भारी पड़ रही विवादों की चर्चा

सरकारी सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों के दौरान भारत जिन रणनीतिक, आर्थिक और व्यापारिक समझौतों को हासिल कर रहा है, उन्हें कई बार अंतरराष्ट्रीय मीडिया में पर्याप्त जगह नहीं मिलती। इसके बजाय प्रेस फ्रीडम, मानवाधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर सवालों को ज्यादा प्रमुखता दी जाती है। सरकार का मानना है कि इससे भारत की वैश्विक छवि को प्रभावित करने की कोशिश होती है।

नॉर्वे यात्रा के दौरान भी कुछ विदेशी पत्रकारों और संगठनों ने भारत में मीडिया स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह मुद्दा तेजी से चर्चा में आ गया। विपक्षी दलों ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की लोकतांत्रिक छवि को लेकर लगातार सवाल उठना चिंताजनक है।

सरकार ने आलोचनाओं को बताया ‘चुनिंदा एजेंडा’

सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था है और यहां मीडिया पूरी स्वतंत्रता के साथ काम करता है। उनका दावा है कि कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं और विदेशी प्लेटफॉर्म भारत की उपलब्धियों की तुलना में विवादित मुद्दों को अधिक उछालते हैं। सरकार का यह भी कहना है कि भारत की मजबूत होती अर्थव्यवस्था, वैश्विक कूटनीति में बढ़ती भूमिका और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों से कई शक्तियां असहज हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी के विदेशी दौरों के दौरान अब सिर्फ व्यापार और रणनीतिक साझेदारी ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र और मीडिया से जुड़े मुद्दे भी वैश्विक विमर्श का हिस्सा बनते जा रहे हैं। ऐसे में भारत सरकार के सामने अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि को संतुलित बनाए रखने की चुनौती और बढ़ सकती है।

वैश्विक राजनीति में बढ़ रही भारत की भूमिका

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने वैश्विक मंचों पर अपनी सक्रियता काफी बढ़ाई है। जी-20, क्वाड, ब्रिक्स और यूरोपीय देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने की दिशा में भारत लगातार प्रयास कर रहा है। इसी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर विदेशी दौरे पर दुनिया की नजर रहती है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भारत की बढ़ती वैश्विक मौजूदगी के साथ आलोचनाएं और अंतरराष्ट्रीय जांच भी स्वाभाविक रूप से बढ़ रही हैं।

सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस

नॉर्वे दौरे से जुड़ा यह मुद्दा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी तेजी से ट्रेंड करने लगा। एक तरफ समर्थकों ने सरकार का बचाव करते हुए इसे भारत विरोधी नैरेटिव बताया, वहीं आलोचकों ने प्रेस फ्रीडम और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर सवाल उठाए। एक्स, फेसबुक और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इस बहस ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया।

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