तेहरान। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद देश की सत्ता और भविष्य को लेकर कयास तेज हो गए हैं। इस बीच जिस नाम ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं, वह है अली लारीजानी। शांत, व्यावहारिक और बौद्धिक छवि वाले लारीजानी का रुख अचानक बेहद आक्रामक हो गया है। अंतरराष्ट्रीय हलकों में इसे ईरान की बदलती रणनीति का संकेत माना जा रहा है।
अमेरिका और इजरायल पर सीधा हमला
कतर आधारित मीडिया नेटवर्क Al Jazeera की रिपोर्ट के मुताबिक, कथित इजरायली-अमेरिकी हवाई हमले में खामेनेई की मौत के 24 घंटे के भीतर लारीजानी ने ईरान के सरकारी टेलीविजन पर राष्ट्र को संबोधित किया। अपने संदेश में उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि “अमेरिका और जायोनी शासन ने ईरानी राष्ट्र के दिल में आग लगा दी है।” उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान इस कार्रवाई का ऐसा जवाब देगा जिसे “कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।”
लारीजानी ने कहा कि ईरान के बहादुर सैनिक और जनता अंतरराष्ट्रीय ताकतों को कड़ा सबक सिखाएंगे। उनके बयान के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ट्रांजिशनल काउंसिल में अहम भूमिका
खामेनेई के निधन के बाद बनी तीन सदस्यीय अंतरिम परिषद में लारीजानी को शामिल किया गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में ईरान की सत्ता संरचना में उनकी भूमिका और मजबूत हो सकती है। वे वर्तमान में ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव हैं और सुरक्षा तथा परमाणु नीति से जुड़े मामलों में उनका गहरा अनुभव है।
नजफ से तेहरान तक का सफर
अली लारीजानी का जन्म 3 जून 1958 को इराक के पवित्र शहर नजफ में हुआ था। उनका परिवार पहले से ही धार्मिक और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली रहा है। अमेरिकी पत्रिका Time ने 2009 में लारीजानी परिवार को ‘ईरान का केनेडी परिवार’ बताया था।
उनके पिता मिर्जा हाशेम अमोली प्रतिष्ठित धर्मगुरु थे। लारीजानी के भाई भी ईरान की न्यायपालिका और असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स जैसे शक्तिशाली संस्थानों में अहम पदों पर रह चुके हैं। असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स वही निकाय है जिसे सुप्रीम लीडर के चयन और निगरानी का अधिकार प्राप्त है।
क्रांतिकारी नेतृत्व से करीबी रिश्ते
1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद लारीजानी ने सत्ता प्रतिष्ठान के साथ मजबूत संबंध बनाए। उन्होंने फरीदेह मोताहारी से विवाह किया, जो इस्लामिक रिपब्लिक के संस्थापक रूहोल्लाह खुमैनी के करीबी सहयोगी मोर्तेजा मोताहारी की बेटी हैं। इससे उनका राजनीतिक दायरा और मजबूत हुआ।
संसद से राष्ट्रीय सुरक्षा तक
लारीजानी का राजनीतिक करियर लंबा और प्रभावशाली रहा है। वे 2008 से 2020 तक ईरान की संसद के स्पीकर रहे। इससे पहले और बाद में भी वे सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव पद पर कार्य कर चुके हैं। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने उम्मीदवारी पेश की थी, लेकिन उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। इसके बावजूद सत्ता के गलियारों में उनका प्रभाव बना रहा।
बेहद पढ़े-लिखे और दार्शनिक छवि
धार्मिक पृष्ठभूमि से आने के बावजूद लारीजानी ने आधुनिक शिक्षा में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। उन्होंने Sharif University of Technology से गणित और कंप्यूटर साइंस में स्नातक किया। इसके बाद University of Tehran से पश्चिमी दर्शनशास्त्र में मास्टर और पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। उनकी डॉक्टरेट थीसिस 18वीं सदी के जर्मन दार्शनिक Immanuel Kant पर आधारित थी।
उनकी बौद्धिक पहचान और कूटनीतिक अनुभव के कारण उन्हें कभी पश्चिम से संवाद का चेहरा माना जाता था, लेकिन हालिया बयान ने संकेत दिया है कि ईरान अब सख्त रुख अपनाने की ओर बढ़ सकता है।
आगे क्या?
ईरान की सत्ता, मध्य पूर्व की राजनीति और वैश्विक कूटनीति पर आने वाले दिनों में बड़ा असर पड़ सकता है। खामेनेई के बाद नेतृत्व किस दिशा में जाएगा, इस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी है। अली लारीजानी का उग्र बयान इस बात का संकेत है कि तेहरान फिलहाल झुकने के मूड में नहीं है।
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