T20 World Cup 2026: पाकिस्तान को मिला कुदरत का निजाम! इंग्लैंड की जीत ने दिया ‘जीवनदान’, अब सेमीफाइनल के लिए करना होगा ये बड़ा काम

कोलंबो। आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 में रोमांच अपने चरम पर है। सुपर-8 राउंड के एक बेहद नाटकीय मोड़ पर किस्मत ने एक बार फिर पड़ोसी देश पाकिस्तान का साथ दिया है। शुक्रवार को कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में इंग्लैंड ने न्यूजीलैंड को 4 विकेट से हराकर टूर्नामेंट से बाहर होने की कगार पर खड़े पाकिस्तान को ‘वेंटिलेटर’ से बाहर निकाल लिया है। अगर इस मैच में न्यूजीलैंड जीत जाता, तो पाकिस्तान का बोरिया-बिस्तर शुक्रवार को ही बंध गया होता, लेकिन अब पाकिस्तान के पास सेमीफाइनल का टिकट कटाने का सुनहरा मौका है।

पाकिस्तान के लिए क्यों जरूरी थी इंग्लैंड की जीत?

पाकिस्तान फिलहाल सुपर-8 के अपने ग्रुप में तीसरे नंबर पर है। उसका नेट रन-रेट ($NRR$) $-0.461$ था, जो उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बनी हुई थी। सेमीफाइनल की रेस में बने रहने के लिए उसे न सिर्फ इंग्लैंड की जीत की दरकार थी, बल्कि यह भी जरूरी था कि न्यूजीलैंड की टीम हारे। इंग्लैंड ने 19.3 ओवर में लक्ष्य हासिल कर न्यूजीलैंड को टूर्नामेंट से लगभग बाहर कर दिया है और पाकिस्तान के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। हालांकि, अगर इंग्लैंड यह मैच और जल्दी (जैसे 14-15 ओवर में) जीत जाता, तो पाकिस्तान की राह और भी आसान हो जाती।

श्रीलंका के खिलाफ ‘करो या मरो’ का समीकरण

इंग्लैंड की जीत ने पाकिस्तान को जीवनदान तो दे दिया है, लेकिन शनिवार को श्रीलंका के खिलाफ होने वाला मुकाबला पाकिस्तान के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा। सेमीफाइनल में जगह पक्की करने के लिए पाकिस्तान के सामने अब गणित बिल्कुल साफ है:

  • अगर पाकिस्तान पहले बल्लेबाजी करता है: उसे श्रीलंका को कम से कम 64 रनों के अंतर से हराना होगा।

  • अगर पाकिस्तान लक्ष्य का पीछा करता है: उसे श्रीलंका द्वारा दिए गए टारगेट को महज 13.1 ओवर (79 गेंदों) में हासिल करना होगा।

पाकिस्तानी गेंदबाजों पर टिकीं उम्मीदें

पाकिस्तान के लिए यह चुनौती आसान नहीं रहने वाली है। श्रीलंकाई पिच पर टॉस की भूमिका अहम होगी। अगर पाकिस्तानी गेंदबाज श्रीलंका को कम स्कोर पर रोकने में कामयाब रहते हैं, तभी 13.1 ओवर में लक्ष्य हासिल करना मुमकिन हो पाएगा। अगर श्रीलंका ने बड़ा स्कोर खड़ा कर दिया, तो पाकिस्तान के लिए नेट रन-रेट को संभालना नामुमकिन हो जाएगा। अब देखना यह है कि क्या बाबर आजम की सेना इस ‘गोल्डन चांस’ को भुना पाती है या एक बार फिर कुदरत के निजाम के भरोसे रहकर घर वापस लौटती है।

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