इस साल दिवाली का पावन पर्व 8 नवंबर 2026 को मनाया जा रहा है। दीपावली की रात मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूजा के दौरान घरों में घी और तेल के दीपक जलाए जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार दिवाली की रात भगवान गणेश के समक्ष सरसों के तेल का दीपक (Mustard Oil Lamp) जलाने का विशेष विधान क्यों माना गया है? आइए जानते इसके पीछे का धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय कारण।
सरसों के तेल के दीपक का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
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नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं का नाश: हिंदू मान्यताओं में भगवान गणेश को ‘विघ्नहर्ता’ (सारे संकटों को हरने वाले) कहा जाता है। सरसों के तेल को तंत्र और ज्योतिष शास्त्र में ऊर्जा का एक मजबूत स्रोत माना गया है। गणेश जी के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा, बुरी बलाएं और बाधाएं दूर होती हैं।
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शनि और राहु-केतु के दोषों का निवारण: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सरसों का संबंध शनि ग्रह से माना जाता है। दीपावली की रात भगवान गणेश की कृपा पाने के साथ-साथ यदि सरसों के तेल का दीपक जलाया जाए, तो इससे कुंडली में मौजूद शनि, राहु या केतु से जुड़े दोष और कष्ट भी शांत होते हैं।
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शुद्धता और सुरक्षा का प्रतीक: दीपक की लौ प्रकाश का वह पुंज है जो अज्ञानता के अंधकार को मिटाती है। सरसों के तेल की लौ थोड़ी तेज और स्थिर होती है, जो शत्रुओं और अवांछित बाधाओं से घर की रक्षा का प्रतीक मानी जाती है।
पूजा के दौरान इन बातों का रखें विशेष ध्यान
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घी का दीपक बनाम तेल का दीपक: अमूमन माता लक्ष्मी के दाहिने ओर घी का दीपक जलाया जाता है, जबकि विशेष साधना, सुरक्षा और बाधा मुक्ति के लिए भगवान गणेश या भैरव बाबा के समक्ष सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित किया जाता है।
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सही दिशा: दीपक हमेशा इस प्रकार रखें कि उसकी लौ पूर्व या उत्तर दिशा की ओर हो, जिससे घर में सकारात्मकता और समृद्धि का वास बना रहे।
इस दिवाली विधि-विधान से गणेश-लक्ष्मी का पूजन करें और अपने जीवन से सभी विघ्नों को दूर भगाएं।
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