
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की हाई-लेवल जनरल डिबेट मंगलवार से शुरू हो रही है। 22 से 28 सितंबर तक चलने वाली इस अहम बैठक में दुनिया के करीब 130 राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्यक्ष व्यक्तिगत रूप से हिस्सा लेने पहुंच रहे हैं। इस दौरान युद्ध, वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति, जलवायु परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहेंगे। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक संगठन के सभी 193 सदस्य देशों को जनरल डिबेट में अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।
ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति की संभावित मुलाकात पर निगाहें
इस बार संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध की छाया सबसे अहम मुद्दों में शामिल है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया है। ट्रंप ने कहा है कि वह ऐसी मुलाकात के लिए संभवत: तैयार हो सकते हैं। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच मुलाकात की कोई अंतिम पुष्टि सामने नहीं आई है।
संभावित बैठक ऐसे समय हो सकती है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष कई महीनों से जारी है और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत की संभावनाओं पर भी चर्चा चल रही है। पेजेशकियन संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान का पक्ष रखने वाले हैं, जबकि ट्रंप मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर महासभा को संबोधित करेंगे।
आज ट्रंप समेत कई बड़े नेता रखेंगे अपनी बात
जनरल डिबेट की शुरुआत मंगलवार को होगी। परंपरा के अनुसार ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा शुरुआती वक्ताओं में होंगे, जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का संबोधन निर्धारित है। इसके अलावा जॉर्डन, तुर्किये, कतर और फ्रांस समेत कई देशों के नेता भी मंगलवार को महासभा को संबोधित करेंगे।
ट्रंप के कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से भाषण के अलावा कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकें भी शामिल हैं। रॉयटर्स के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति की बैठकों में यूरोपीय देशों, यूक्रेन और खाड़ी क्षेत्र के नेताओं के साथ बातचीत शामिल है।
ईरान की ओर से पेजेशकियन रखेंगे पक्ष
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन भी इस महासभा में शामिल हो रहे हैं। उनकी मौजूदगी ऐसे समय महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जारी है। पेजेशकियन संयुक्त राष्ट्र के मंच का इस्तेमाल ईरान का पक्ष अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने रखने के लिए कर सकते हैं। हालांकि, किसी संभावित ट्रंप-पेजेशकियन बैठक से बड़े कूटनीतिक नतीजे निकलेंगे या नहीं, इसकी अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी न्यूयॉर्क पहुंच चुके हैं। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार यह युद्ध शुरू होने के बाद उनकी पहली अमेरिका यात्रा है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने के लिए अमेरिकी प्रशासन की ओर से वीजा मंजूर किया गया है।यूक्रेन से लेकर खाड़ी संकट तक कई मुद्दे अहम
इस साल की महासभा ऐसे दौर में हो रही है जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और सुरक्षा संकट बने हुए हैं। ईरान से जारी संघर्ष के अलावा यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व की स्थिति, ऊर्जा बाजार और समुद्री मार्गों की सुरक्षा भी नेताओं की बातचीत में प्रमुख मुद्दे रहेंगे। रॉयटर्स के मुताबिक ट्रंप के कार्यक्रम में यूक्रेन और खाड़ी देशों से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत शामिल है।
संयुक्त राष्ट्र ने इस साल की जनरल डिबेट की थीम ‘Restoring trust, managing transformation: A United Nations that delivers for all’ रखी है। महासभा के दौरान जलवायु कार्रवाई, समुद्र के बढ़ते जलस्तर, महामारी से निपटने की तैयारी और परमाणु हथियारों से जुड़े मुद्दों पर भी उच्चस्तरीय बैठकें होंगी।
भारत की ओर से 26 सितंबर को जयशंकर रखेंगे पक्ष
भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाई-लेवल सेशन को 26 सितंबर को संबोधित करेंगे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक वह भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं और महासभा के दौरान विभिन्न बहुपक्षीय तथा द्विपक्षीय बैठकों में भी हिस्सा लेंगे।
जनरल डिबेट 28 सितंबर तक चलेगी। संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार 193 सदस्य देशों के प्रतिनिधि इस दौरान वैश्विक चुनौतियों और अपने-अपने देशों की प्राथमिकताओं को महासभा के सामने रखेंगे।
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