
नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय BRICS शिखर सम्मेलन के सफल समापन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के राजनीतिक नेताओं की ओर से बधाई मिल रही है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद रविशंकर प्रसाद ने सम्मेलन को भारत के लिए ऐतिहासिक सफलता बताया है। वहीं बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी BRICS के साझा घोषणापत्र को भारत की सूझबूझ और प्रभावी कूटनीति का परिणाम बताया है। दोनों नेताओं ने खास तौर पर घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले और फिलिस्तीन के मुद्दे के उल्लेख को महत्वपूर्ण बताया।
BRICS Summit में भारत की कूटनीति की चर्चा
भारत की मेजबानी में हुए BRICS सम्मेलन में सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन मुलाकातों में आर्थिक सहयोग, व्यापार, आपसी संबंधों और साझा वैश्विक हितों से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। सम्मेलन का समापन साझा घोषणापत्र के साथ हुआ, जिसमें कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सदस्य देशों की साझा चिंताओं और रुख को सामने रखा गया।
साझा घोषणापत्र में पहलगाम का जिक्र क्यों अहम?
BRICS के साझा घोषणापत्र में 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले की निंदा को भारत के लिए अहम कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। रविशंकर प्रसाद ने इसी बिंदु को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और भारत की विदेश नीति की सराहना की। BRICS घोषणा में आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख को लेकर भारत की प्राथमिकता को भी महत्व मिला है।
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने BRICS को एक प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने सम्मेलन के नतीजों पर सवाल उठाने वाले विपक्षी नेताओं, खासकर कांग्रेस, से भी सवाल किया और कहा कि इस तरह की उपलब्धियों को राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय भारत के हित के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
रविशंकर प्रसाद ने किन देशों का किया जिक्र?
पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान रविशंकर प्रसाद ने BRICS सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता में चीन, रूस, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील समेत प्रमुख देशों के साथ संवाद का एक मजबूत मंच तैयार हुआ।
उन्होंने सम्मेलन के दौरान हुए द्विपक्षीय संवाद का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। उन्होंने चीन की ओर से भारत के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने की पहल का भी जिक्र किया। इसके अलावा रूस, मलेशिया और ईरान के नेताओं की ओर से प्रधानमंत्री मोदी की सराहना किए जाने की बात भी उन्होंने कही।
मायावती ने भी मोदी सरकार की विदेश नीति को सराहा
BRICS Summit को लेकर BSP प्रमुख मायावती की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। मायावती ने सम्मेलन के साझा घोषणापत्र को भारत की समझदारी और बेहतर कूटनीति का परिणाम बताया। उन्होंने विशेष रूप से फिलिस्तीन के समाधान और पहलगाम आतंकी हमले के उल्लेख को महत्वपूर्ण करार दिया।
मायावती की प्रतिक्रिया इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्होंने BRICS सम्मेलन के परिणामों और भारत की कूटनीतिक भूमिका को सकारात्मक नजरिए से देखा है। उनके मुताबिक साझा घोषणापत्र में महत्वपूर्ण वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों का शामिल होना भारत की बातचीत और कूटनीतिक क्षमता को दर्शाता है।
फिलिस्तीन मुद्दे पर भी BRICS का रुख
BRICS घोषणापत्र में फिलिस्तीन से जुड़े मुद्दे का उल्लेख भी सम्मेलन के महत्वपूर्ण पहलुओं में शामिल रहा। BRICS देशों ने गाजा और फिलिस्तीनी मुद्दे पर अपने रुख को घोषणापत्र में जगह दी। इससे सम्मेलन की चर्चा केवल आर्थिक और व्यापारिक सहयोग तक सीमित नहीं रही, बल्कि वैश्विक संघर्षों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के मुद्दे भी केंद्र में रहे।
भारत की मेजबानी में हुए सम्मेलन में वैश्विक दक्षिण, बहुपक्षीय सहयोग और बदलती विश्व व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी जोर रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS को वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए सहयोग और संवाद का महत्वपूर्ण मंच बताया।
BRICS Summit को भारत की बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि क्यों माना जा रहा?
इस सम्मेलन में अलग-अलग रणनीतिक और राजनीतिक प्राथमिकताओं वाले देशों को एक साझा मंच पर लाना भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। BRICS के विस्तारित स्वरूप में विभिन्न क्षेत्रों के प्रभावशाली देश शामिल हैं और इनके बीच कई मुद्दों पर मतभेद भी हैं। इसके बावजूद साझा घोषणापत्र पर सहमति बनना भारत की अध्यक्षता के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन के समापन पर कहा कि BRICS पर ग्लोबल साउथ का भरोसा बढ़ा है। भारत की अध्यक्षता के दौरान स्वास्थ्य, आपूर्ति श्रृंखला, स्टार्टअप, तकनीक, ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए कई प्रस्तावों पर भी जोर दिया गया।
कुल मिलाकर BRICS Summit 2026 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिल रही राजनीतिक बधाइयों के बीच रविशंकर प्रसाद और मायावती की प्रतिक्रियाएं खास चर्चा में हैं। दोनों नेताओं ने अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि के बावजूद सम्मेलन के साझा घोषणापत्र और उसमें पहलगाम तथा फिलिस्तीन जैसे मुद्दों के उल्लेख को भारत की कूटनीतिक उपलब्धि से जोड़कर देखा है।
Hindustan Awaaz – Hindustan Newspaper, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया