
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। दोनों देशों के बीच नए आर्थिक प्रतिबंधों और संभावित अमेरिकी कार्रवाई को लेकर बयानबाजी लगातार तीखी होती जा रही है। इसी बीच ईरान ने अमेरिका को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसके खिलाफ आर्थिक युद्ध शुरू किया गया तो वह भी पीछे नहीं हटेगा। तेहरान ने साफ संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी के रास्ते होने वाले तेल निर्यात को पूरी तरह रोक दिया जाएगा।
अमेरिका के ‘इकॉनमिक D-Day’ पर ईरान का पलटवार
ईरान की यह कड़ी प्रतिक्रिया अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के बयान के बाद सामने आई है। बेसेंट ने संकेत दिया था कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए बड़े आर्थिक अभियान की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी कदमों को लेकर ‘इकॉनमिक D-Day’ जैसी कार्रवाई की चर्चा के बीच तेहरान ने भी अपने जवाब का रुख बेहद आक्रामक कर लिया है।
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसेन रेजाई ने कहा कि यदि अमेरिका आर्थिक युद्ध जारी रखता है तो ईरान तेल निर्यात को लेकर बड़ा कदम उठाएगा। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में तेल की एक बूंद भी निर्यात नहीं की जाएगी।
होर्मुज स्ट्रेट से लेकर फारस की खाड़ी तक तेल सप्लाई रोकने की धमकी
मोहसेन रेजाई के मुताबिक ईरान जरूरत पड़ने पर होर्मुज स्ट्रेट, फारस की खाड़ी और तेल निर्यात के दूसरे रास्तों से भी कच्चे तेल की सप्लाई रोक सकता है। इस बयान को अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए सीधी चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। ऐसे में यहां से तेल की आवाजाही प्रभावित होने पर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी दबाव बढ़ सकता है। ईरान की धमकी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और तेहरान के बीच आर्थिक एवं रणनीतिक तनाव पहले से ही गहरा बना हुआ है।
अमेरिका का साथ देने वाले देशों को भी चेतावनी
ईरान ने केवल अमेरिका को ही निशाने पर नहीं लिया है। रेजाई ने कहा कि जो भी देश अमेरिकी आर्थिक अभियान में शामिल होगा या उसका समर्थन करेगा, उसे ईरान की ओर से युद्ध कार्रवाई के तौर पर देखा जा सकता है। इसका मतलब है कि तेहरान संभावित अमेरिकी प्रतिबंधों के साथ खड़े होने वाले देशों को भी अपने जवाब के दायरे में ला सकता है।
ईरान का यह रुख संकेत देता है कि वह अमेरिकी आर्थिक दबाव को केवल प्रतिबंधों तक सीमित मामला नहीं मान रहा है। तेहरान इसे व्यापक टकराव के रूप में देख रहा है और उसी के अनुरूप जवाब देने की चेतावनी दे रहा है।
बढ़ते तनाव से दुनिया की नजर तेल बाजार पर
अमेरिका और ईरान के बीच टकराव बढ़ने की स्थिति में सबसे बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही में किसी भी तरह की गंभीर बाधा से अंतरराष्ट्रीय सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है। इसी वजह से ईरान की ताजा चेतावनी को सिर्फ दोनों देशों के बीच राजनीतिक बयानबाजी के तौर पर नहीं देखा जा रहा है।
फिलहाल अमेरिका की ओर से ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की संभावित रणनीति और तेहरान की ओर से तेल निर्यात रोकने की धमकी ने दोनों देशों के बीच तनाव को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। अब नजर इस बात पर है कि ट्रंप प्रशासन आगे ईरान के खिलाफ क्या कदम उठाता है और तेहरान उस पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है।
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