अयोध्या में स्थापित हुआ दुनिया का इकलौता ‘श्रीराम यंत्र’: तमिलनाडु से आई दिव्य धरोहर, जानें इसकी अद्भुत शक्ति और खासियत

अयोध्या। नवरात्रि के पावन अवसर पर रामनगरी अयोध्या एक बार फिर ऐतिहासिक पल की साक्षी बनी। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राम मंदिर पहुंचकर भगवान रामलला के दर्शन किए और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर के द्वितीय तल पर दुर्लभ ‘श्रीराम यंत्र’ की विधिवत स्थापना की। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा और मंत्रों की गूंज से भर उठा।

नवरात्रि के पहले दिन हुआ भव्य आयोजन

राष्ट्रपति सुबह करीब साढ़े 10 बजे अयोध्या पहुंचीं, जहां उनका स्वागत राज्यपाल और मुख्यमंत्री द्वारा किया गया। इसके बाद उन्होंने मंदिर में प्रवेश कर रामलला के दर्शन किए और राम दरबार में पूजा-अर्चना की। वैदिक आचार्यों की उपस्थिति में विशेष अनुष्ठान के बाद ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना संपन्न हुई। इस आयोजन ने नवरात्रि के पहले दिन को और अधिक विशेष बना दिया।

क्या है ‘श्रीराम यंत्र’ की विशेषता?

‘श्रीराम यंत्र’ केवल एक धातु से बना धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि इसे ब्रह्मांडीय ऊर्जा और वैदिक गणित का अद्भुत संगम माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जैसे ‘श्री यंत्र’ देवी लक्ष्मी का प्रतीक होता है, उसी तरह ‘श्रीराम यंत्र’ भगवान श्रीराम की मर्यादा, शक्ति और विजय का प्रतिनिधित्व करता है। यह यंत्र सकारात्मक ऊर्जा के संचार और आध्यात्मिक संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

तमिलनाडु में हुआ निर्माण, रथयात्रा से पहुंचा अयोध्या

इस विशेष यंत्र का निर्माण कांचीपुरम में स्थित एक प्रतिष्ठित मठ में किया गया। वहां से इसे तिरुपति लाया गया और फिर भव्य रथयात्रा के माध्यम से लगभग 10 दिन पहले अयोध्या पहुंचाया गया। यह यात्रा भी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रही।

150 किलो वजनी, सोने की परत से आच्छादित

‘श्रीराम यंत्र’ का वजन लगभग 150 किलोग्राम बताया जा रहा है। इसे विशेष धातुओं के मिश्रण से तैयार किया गया है और इसके ऊपर सोने की परत चढ़ाई गई है, जो इसकी दिव्यता और भव्यता को और बढ़ाती है। मंदिर के द्वितीय तल पर इसकी स्थापना इसे और भी खास बनाती है।

आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनेगा राम मंदिर

धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस यंत्र की स्थापना के बाद राम मंदिर परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार और अधिक बढ़ेगा। यह न केवल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि वैदिक परंपराओं और भारतीय संस्कृति की गहराई को भी प्रदर्शित करेगा।

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