बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर! क्या तेजस्वी यादव छोड़ेंगे बिहार? राज्यसभा जाने की अटकलों ने गरमाया सियासी पारा

पटना: बिहार की सियासत में इन दिनों एक ही सवाल हर जुबान पर है— क्या तेजस्वी यादव अब दिल्ली की राजनीति करेंगे? बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए होने वाले आगामी चुनाव ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि महागठबंधन की ओर से मिलने वाली इकलौती सीट पर खुद तेजस्वी यादव ताल ठोक सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह बिहार आरजेडी के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत होगा।


राज्यसभा का गणित: कैसे मिलेगी विपक्ष को एक सीट?

बिहार विधानसभा के मौजूदा संख्या बल को देखें तो 5 में से 4 सीटों पर एनडीए (बीजेपी और जेडीयू) की जीत पक्की मानी जा रही है। पेंच पांचवीं सीट पर फंसा है। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 वोटों की जरूरत है।

  • महागठबंधन का आंकड़ा: आरजेडी, कांग्रेस और वामदलों को मिलाकर फिलहाल 35 वोट ही हैं।

  • किंगमेकर की भूमिका: एआईएमआईएम (AIMIM) के 5 और बीएसपी (BSP) के 1 विधायक का समर्थन मिलने पर यह संख्या 41 पहुंच जाती है।

हालांकि, पेंच यह है कि AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने इस बार अपना उम्मीदवार भेजने की शर्त रखी है। लेकिन रविवार को हुई आरजेडी संसदीय दल की बैठक में तेजस्वी को उम्मीदवार चयन के लिए अधिकृत कर दिया गया है, जिससे उनके खुद चुनाव लड़ने की चर्चा तेज हो गई है।

क्यों दिल्ली जाना चाहते हैं तेजस्वी? समर्थकों के अपने तर्क

आरजेडी के भीतर एक बड़ा गुट ऐसा है जो चाहता है कि तेजस्वी अब राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाएं। समर्थकों का मानना है कि:

  • बिहार विधानसभा में विधायकों की कम संख्या के कारण तेजस्वी फिलहाल ‘असहज’ महसूस कर रहे हैं।

  • दिल्ली जाने से उनका कद बढ़ेगा और राष्ट्रीय स्तर के बड़े नेताओं के साथ उनके संपर्क बेहतर होंगे।

  • अखिलेश यादव और डिंपल यादव का उदाहरण देते हुए नेता कह रहे हैं कि जो मीडिया कवरेज और राजनीतिक विस्तार दिल्ली में रहकर संभव है, वह फिलहाल पटना में रहकर मुश्किल दिख रहा है।

विरोध में भी सुर: क्या हताश हो जाएगा आरजेडी कैडर?

वहीं, पार्टी का एक दूसरा धड़ा इस फैसले के पक्ष में नहीं है। उनका मानना है कि अगर तेजस्वी बिहार छोड़ते हैं, तो जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ता खुद को अकेला महसूस करेंगे। इन नेताओं का कहना है कि तेजस्वी को पूरे बिहार का दौरा कर पार्टी को फिर से मजबूत करना चाहिए, न कि दिल्ली की सुरक्षित राह चुननी चाहिए।

चर्चा यह भी है कि यदि तेजस्वी दिल्ली जाते हैं और राघोपुर सीट खाली करते हैं, तो वहां से उनकी बहन राजश्री चुनाव लड़ सकती हैं।

NDA में भी मंथन: कौन जाएगा ऊपरी सदन?

विपक्ष के अलावा एनडीए खेमे में भी नामों को लेकर माथापच्ची जारी है। जेडीयू से केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर का दोबारा जाना लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन उपसभापति हरिवंश के तीसरी बार नामांकन पर सस्पेंस है। वहीं, बीजेपी की ओर से पवन सिंह, उपेंद्र कुशवाहा और नितिन नबीन जैसे बड़े नामों की चर्चा जोरों पर है।

बिहार राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 9 मार्च है और यदि जरूरत पड़ी तो 16 मार्च को वोटिंग होगी। अब सबकी नजरें तेजस्वी के फैसले पर टिकी हैं।

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