2017 से पहले ‘सैफई-रामपुर सिंडिकेट’ पर CM योगी का बड़ा हमला, बोले- पूरी व्यवस्था का खून चूस रहा था सिस्टम

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए 2017 से पहले की कथित व्यवस्था को लेकर ‘सैफई-रामपुर सिंडिकेट’ का जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उस दौर में एक ऐसा सिंडिकेट सक्रिय था, जिसने पूरी व्यवस्था को प्रभावित किया और सरकारी तंत्र को नुकसान पहुंचाया। सीएम योगी ने यह टिप्पणी लखनऊ में एक निगम के डिजिटल पोर्टल और वेबसाइट के औपचारिक लोकार्पण के दौरान की।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम में डिजिटल व्यवस्था की शुरुआत करते हुए कहा कि नए पोर्टल के माध्यम से आउटसोर्स कर्मचारियों की उपस्थिति और उनके वेतन से जुड़ी प्रक्रिया का डिजिटल प्रबंधन किया जाएगा। सरकार की ओर से इसे व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।

डिजिटल पोर्टल और वेबसाइट की हुई शुरुआत

लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबंधित निगम के डिजिटल पोर्टल और वेबसाइट का लोकार्पण किया। इस डिजिटल सिस्टम के जरिए आउटसोर्स कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने से लेकर वेतन प्रबंधन तक की प्रक्रिया को ऑनलाइन और व्यवस्थित करने की व्यवस्था की जाएगी।

सरकार का जोर सरकारी कामकाज में तकनीक के इस्तेमाल और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाने पर है। इसी दौरान मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पिछली सरकारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए समाजवादी पार्टी को निशाने पर लिया।

‘सैफई-रामपुर सिंडिकेट’ का जिक्र कर सपा पर निशाना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 से पहले की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी पर हमला बोला। उन्होंने ‘सैफई-रामपुर सिंडिकेट’ का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय एक ऐसा तंत्र काम कर रहा था, जो पूरी व्यवस्था को प्रभावित कर रहा था।

सीएम योगी के इस बयान को उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी पर उनके बड़े राजनीतिक हमलों में से एक के तौर पर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने मौजूदा सरकार की डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था को पिछली व्यवस्था से अलग बताते हुए अपनी सरकार की कार्यप्रणाली पर जोर दिया।

2027 के चुनाव से पहले यूपी में सियासी हलचल तेज

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। इसी बीच बीजेपी की रणनीति में अयोध्या के बाद मथुरा को लेकर भी चर्चा बढ़ती दिखाई दे रही है। जन्माष्टमी के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मथुरा दौरे और धार्मिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर बीजेपी के कार्यक्रमों ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दिया है।

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद अब मथुरा बीजेपी के प्रमुख राजनीतिक और सांस्कृतिक फोकस में शामिल होता नजर आ रहा है। मंचों से ‘श्रीराम’ के साथ ‘कृष्ण बिहारी’ के जयकारे भी सुनाई दे रहे हैं, जिन्हें 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की व्यापक राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

बीजेपी की नई रणनीति में मथुरा पर फोकस?

अयोध्या में राम मंदिर के बाद मथुरा को लेकर बीजेपी की सक्रियता उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। जन्माष्टमी के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम और पार्टी नेताओं के बयानों के बीच मथुरा का मुद्दा लगातार चर्चा में है।

ऐसे समय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का समाजवादी पार्टी पर ‘सैफई-रामपुर सिंडिकेट’ के जरिए हमला और दूसरी ओर मथुरा को लेकर बीजेपी की सक्रियता, दोनों ही 2027 के चुनावी माहौल को लेकर महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माने जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से संबंधित बयान और उनका संबोधन भी चर्चा में है। इसी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सिंडिकेट का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा।

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