
नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। 24 मार्च 2026, मंगलवार को नवरात्रि का छठा दिन यानी षष्ठी तिथि है। इस दिन देवी दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि मां कात्यायनी की आराधना से भक्तों को साहस, शक्ति और जीवन में विजय प्राप्त होती है। साथ ही, विवाह में आ रही बाधाएं भी दूर होती हैं।
मां कात्यायनी की पूजा का महत्व
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां कात्यायनी ने असुरों का संहार कर धर्म की रक्षा की थी। यही कारण है कि उन्हें साहस और पराक्रम की देवी माना जाता है। इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
शीघ्र विवाह के लिए खास दिन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिन युवाओं के विवाह में देरी हो रही है, उनके लिए मां कात्यायनी की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। विशेष रूप से अविवाहित कन्याएं इस दिन व्रत रखकर मां से मनचाहा वर पाने की कामना करती हैं। कहा जाता है कि सच्ची श्रद्धा से की गई प्रार्थना जल्द ही फल देती है।
लाल रंग का विशेष महत्व
नवरात्रि के छठे दिन लाल रंग को बेहद शुभ माना गया है। इस दिन पूजा के दौरान लाल वस्त्र धारण करना और मां को लाल फूल अर्पित करना विशेष फलदायी होता है। लाल रंग ऊर्जा, साहस और प्रेम का प्रतीक है, जो मां कात्यायनी को अत्यंत प्रिय है।
मंगलवार का विशेष संयोग
इस बार 24 मार्च को मंगलवार का दिन पड़ रहा है, जो अपने आप में शुभ संयोग माना जा रहा है। मंगलवार का संबंध शक्ति और मंगल ग्रह से जुड़ा होता है, जिससे इस दिन मां की पूजा करने का महत्व और बढ़ जाता है। श्रद्धालु इस दिन विशेष पूजन, व्रत और हवन करते हैं।
ऐसे करें मां कात्यायनी की पूजा
छठे दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मां कात्यायनी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप जलाएं और उन्हें लाल फूल, अक्षत, चंदन और भोग अर्पित करें। दुर्गा सप्तशती या कात्यायनी मंत्र का जाप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। पूजा के अंत में मां की आरती जरूर करें।
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