
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंच रही है। इस अभियान के तहत बड़ी संख्या में नए मतदाताओं के नाम जोड़े जा रहे हैं। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जो लोग अभी Form-6 भरकर मतदाता बनने के लिए आवेदन कर रहे हैं, उनका नाम अगले एसआईआर तक सुरक्षित रहेगा। यानी अभी पंजीकरण कराने वालों को भविष्य में विशेष लाभ मिलेगा और नाम की मैपिंग से जुड़ी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
दरअसल प्रदेश में करोड़ों मतदाताओं के नाम नो-मैपिंग की वजह से सूची से कट गए थे। इस स्थिति में चुनाव आयोग ने ऐसे मतदाताओं को नोटिस भेजकर अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है। इसके साथ ही नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए भी विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
अभी आवेदन करने पर मिलेगा अतिरिक्त फायदा
चुनाव आयोग के अनुसार वर्तमान में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के बाद अगला विशेष गहन पुनरीक्षण करीब 20 से 22 साल बाद होगा। ऐसे में जो लोग अभी Form-6 भरकर अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराते हैं, उनका नाम स्थायी रूप से मैप हो जाएगा। बाद में यदि वे किसी दूसरे क्षेत्र में स्थानांतरित होते हैं तो उसी नाम को दूसरी मतदाता सूची में ट्रांसफर भी कराया जा सकेगा।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में भी कोई व्यक्ति मतदाता बन सकता है, लेकिन उसे अभी मिलने वाला यह अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा।
सीईओ ने डीईओ को दिए विशेष निर्देश
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि 1 जनवरी 2026 को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं को मतदाता सूची में शामिल करने पर विशेष जोर दिया जाए।
आंकड़ों के अनुसार अब तक 79 लाख से अधिक लोग Form-6 भरकर मतदाता बनने के लिए आवेदन कर चुके हैं, जो इस अभियान की बड़ी सफलता मानी जा रही है।
6 मार्च तक भर सकते हैं Form-6
चुनाव आयोग ने बताया कि दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के बीच 6 मार्च तक Form-6 भरकर आवेदन किया जा सकता है। जो भी आवेदन इस अवधि में प्राप्त होंगे, उनके आधार पर नाम 10 अप्रैल को जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे।
18 अप्रैल को जारी होगी अंतिम वोटर लिस्ट
चुनाव आयोग के अनुसार 18 अप्रैल को प्रकाशित होने वाली मतदाता सूची वर्ष 2025-26 की एसआईआर प्रक्रिया की अंतिम सूची होगी। इस सूची में नाम शामिल होने के बाद मैपिंग से जुड़ी समस्याएं नहीं रहेंगी।
दरअसल वर्ष 2003 की मतदाता सूची से करीब 1.04 करोड़ नामों का मिलान नहीं हो पाया, जिसके कारण इन मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। अब उन्हें सुनवाई के लिए संबंधित ईआरओ और एईआरओ के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ रहे हैं।
ऐसे में चुनाव आयोग लोगों से अपील कर रहा है कि समय रहते अपना नाम मतदाता सूची में शामिल करा लें, ताकि मतदान के अधिकार से वंचित न रहना पड़े।
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