
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पिछले 53 घंटों से जारी मुसलाधार बारिश और तेज हवाओं ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। शहर में बिना रुके हो रही बारिश से जहां कई सालों के रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए हैं, वहीं भीषण तबाही का मंजर भी देखने को मिल रहा है। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कई इलाकों में कच्चे मकान ढह गए हैं, जिसमें बख्शी का तालाब (BKT) के भौली गांव में एक मकान गिरने से एक किसान की दर्दनाक मौत हो गई।
24 घंटे में 125 मिमी से ज्यादा बारिश, 19 साल में सबसे ठंडा रहा दिन
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, लखनऊ में बीते 24 घंटों में 125.1 मिमी बारिश दर्ज की गई, जिसने इस मानसून सीजन के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। यह पिछले 15 सालों में सितंबर के दौरान हुई सबसे ज्यादा बारिश में से एक है (इससे पहले 22 अगस्त 2011 को 143.7 मिमी बारिश दर्ज हुई थी)। इस मूसलाधार बारिश का सीधा असर तापमान पर भी पड़ा है। 25 सितंबर को शहर का अधिकतम तापमान गिरकर महज 23.5 डिग्री सेल्सियस रह गया, जिसने पिछले 19 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। वर्ष 2007 में 25 सितंबर का अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।
जलभराव से बेहाल शहर, घरों के किचन-बेडरूम तक पहुंचा पानी
शहर के पॉश इलाकों से लेकर सामान्य मोहल्लों, सड़कों और पार्कों में कई फीट तक पानी भर चुका है। स्थिति इतनी खराब है कि कई क्षेत्रों में बारिश का पानी लोगों के बेडरूम और किचन तक में घुस गया है। मरीन ड्राइव के पास बने अंडरपास में जलभराव की वजह से गाड़ियां बंद हो गईं, जिसके बाद चालकों को कमर भर पानी में गाड़ियों को धक्का लगाकर बाहर निकालना पड़ा।
पावर हाउसों में ब्लास्ट से बत्ती गुल, सड़कों पर गिरे दर्जनों पेड़
तूफानी हवाओं और मूसलाधार बारिश का सबसे बड़ा असर बिजली व्यवस्था और ट्रैफिक पर पड़ा है। कई पावर हाउसों में जलभराव और शॉर्ट सर्किट के कारण ब्लास्ट हुए हैं और बड़े फॉल्ट आए हैं, जिससे शहर के बड़े हिस्से में घंटों से बिजली गुल है। नगर निगम के मुताबिक, अलीगंज, खजाना रोड और आशियाना जैसे इलाकों में तेज हवाओं से 38 से ज्यादा विशाल पेड़ उखड़कर सड़कों पर गिर गए, जिसकी वजह से नीचे खड़ी कई गाड़ियां दबकर क्षतिग्रस्त हो गईं।
किसानों पर टूटा कुदरत का कहर, धान और केले की फसल पूरी तरह बर्बाद
ग्रामीण और आउटर इलाकों में रहने वाले किसानों के लिए यह बारिश काल साबित हुई है। झोंकेदार हवाओं के साथ गिरी बारिश की वजह से खेतों में खड़ी धान और केले की पकी-पकाई फसलें जमीन पर बिछ गई हैं। अचानक आई इस आपदा से किसानों का भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और उनकी महीनों की मेहनत पूरी तरह पानी में बह गई है।
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