
नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बेहद करीबी सैन्य सहयोगी के तौर पर अपनी अलग पहचान बनाने वाले मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने भारतीय सेना से समय से पहले विदाई ले ली है। 4 पैरा स्पेशल फोर्सेज से जुड़े रहे मेजर सांब्याल राष्ट्रपति मुर्मू के Aide-de-Camp (ADC) के रूप में लंबे समय तक उनके साथ नजर आए। गणतंत्र दिवस से लेकर राष्ट्रपति के विभिन्न आधिकारिक कार्यक्रमों तक उनकी मौजूदगी लगातार चर्चा में रही। अब सेना की वर्दी छोड़ने के फैसले ने एक बार फिर उन्हें सुर्खियों में ला दिया है।
राष्ट्रपति के साथ हर अहम मौके पर दिखते थे मेजर सांब्याल
राष्ट्रपति के ADC के तौर पर मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल की भूमिका केवल औपचारिक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं थी। राष्ट्रपति के सार्वजनिक कार्यक्रमों, समारोहों और यात्राओं के दौरान वह अक्सर उनके साथ दिखाई देते थे। उनके शांत स्वभाव, अनुशासित अंदाज और प्रोटोकॉल के प्रति सजगता ने लोगों का ध्यान खींचा।
बारिश के दौरान राष्ट्रपति के लिए छाता पकड़ने से लेकर भावुक क्षण में रूमाल उपलब्ध कराने तक उनकी कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इन तस्वीरों के बाद वह सेना और राष्ट्रपति भवन से जुड़े एक ऐसे चेहरे के रूप में पहचाने जाने लगे, जिसे आम लोग भी सोशल मीडिया के जरिए जानने लगे।
4 पैरा स्पेशल फोर्सेज से राष्ट्रपति भवन तक का सफर
मेजर सांब्याल का सैन्य करियर भी काफी खास रहा है। वह 4 पैरा स्पेशल फोर्सेज के अधिकारी रहे हैं। इससे पहले 2021 में गणतंत्र दिवस परेड के दौरान वह जाट रेजिमेंट के दल का नेतृत्व करते हुए चर्चा में आए थे। उनके नेतृत्व में दल ने बेस्ट मार्चिंग कंटिजेंट ट्रॉफी हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने प्रतिष्ठित 4 पैरा स्पेशल फोर्सेज का हिस्सा बनने का रास्ता चुना।
स्पेशल फोर्सेज में सेवा के बाद राष्ट्रपति के ADC के रूप में उनकी नियुक्ति उनके सैन्य करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनी। राष्ट्रपति के ADC की जिम्मेदारी बेहद प्रतिष्ठित मानी जाती है और इसमें अधिकारी को सैन्य अनुशासन के साथ-साथ उच्च स्तर के प्रोटोकॉल और आधिकारिक कार्यक्रमों की समझ भी रखनी होती है।
फिर अचानक क्यों छोड़ दी सेना?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस अधिकारी का सेना में करियर आगे बढ़ रहा था, उन्होंने समय से पहले विदाई क्यों ले ली? उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने व्यक्तिगत और पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए यह फैसला लिया है। उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि यह निर्णय किसी सैन्य विवाद या अचानक हुई कार्रवाई का परिणाम नहीं था, बल्कि निजी परिस्थितियों से जुड़ा फैसला था।
मेजर सांब्याल ने अपने विदाई संदेश में सेना की वर्दी से अपने गहरे लगाव का भी जिक्र किया। उनके लिए सेना में जाना बचपन के सपने जैसा था और वर्दी उतारने का फैसला आसान नहीं था। हालांकि, जिंदगी में कुछ परिस्थितियां ऐसी आती हैं, जब व्यक्ति को अपने रास्ते में बदलाव करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि इस फैसले में उनके परिवार का समर्थन उनके साथ रहा।
राष्ट्रपति मुर्मू से विदाई के बाद फिर हुई मुलाकात
सेना से विदाई के बाद भी मेजर सांब्याल और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बीच सम्मान और आत्मीयता का रिश्ता सार्वजनिक रूप से दिखाई दिया। रिपोर्टों के मुताबिक 21 अगस्त 2026 को उन्होंने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात की। इस मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद उनके सेना छोड़ने की खबर और ज्यादा चर्चा में आ गई। राष्ट्रपति भवन की डिजिटल फोटो लाइब्रेरी में भी उन्हें पूर्व ADC और सेवानिवृत्त अधिकारी के तौर पर दर्ज किया गया है।
मुलाकात के बाद मेजर सांब्याल ने राष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त किया और उनके मार्गदर्शन व आशीर्वाद को अपने लिए महत्वपूर्ण बताया। इससे यह साफ होता है कि सेना से विदाई के बावजूद राष्ट्रपति भवन में उनके कार्यकाल की स्मृतियां उनके लिए खास बनी हुई हैं।
सैन्य परिवार से आते हैं मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल
मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल जम्मू-कश्मीर के सांबा क्षेत्र से जुड़े सैन्य पृष्ठभूमि वाले परिवार से आते हैं। उनके सैन्य करियर में NDA और IMA की ट्रेनिंग के बाद भारतीय सेना में कमीशन, जाट रेजिमेंट में सेवा, गणतंत्र दिवस परेड की जिम्मेदारी, 4 पैरा स्पेशल फोर्सेज और फिर राष्ट्रपति के ADC की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण पड़ाव रहे।
उनका सफर इस मायने में भी उल्लेखनीय रहा कि एक ओर वह स्पेशल फोर्सेज के कठिन सैन्य प्रशिक्षण से जुड़े रहे तो दूसरी ओर राष्ट्रपति भवन जैसे बेहद प्रोटोकॉल-केंद्रित वातावरण में संवैधानिक पदाधिकारी के सैन्य सहयोगी की जिम्मेदारी निभाई।
सोशल मीडिया पर कैसे बने चर्चित चेहरा?
मेजर सांब्याल की लोकप्रियता का बड़ा कारण राष्ट्रपति के साथ उनकी तस्वीरें और वीडियो रहे। खासकर बारिश में राष्ट्रपति के लिए छाता पकड़ने और भावुक क्षणों में उनकी मदद करने वाली तस्वीरों ने इंटरनेट पर खूब ध्यान खींचा। उनकी वर्दी, व्यक्तित्व, अनुशासन और शांत व्यवहार को लेकर सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में प्रतिक्रियाएं आईं।
धीरे-धीरे उनका नाम सैन्य हलकों से बाहर भी पहचाना जाने लगा। सोशल मीडिया पर उनके प्रशंसकों ने उन्हें लेकर पोस्ट और फैन पेज तक बनाए। हालांकि, उनकी असली पहचान एक प्रशिक्षित सैन्य अधिकारी और राष्ट्रपति के ADC के रूप में रही।
अब आगे क्या करेंगे मेजर सांब्याल?
सेना से समय से पहले विदाई के बाद अब सबसे ज्यादा उत्सुकता उनके अगले कदम को लेकर है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उन्होंने फिलहाल अपने भविष्य की विस्तृत योजना सार्वजनिक नहीं की है। उन्होंने संकेत दिया है कि सही समय आने पर अपने अगले कदम की जानकारी देंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि सेना से विदाई का अर्थ देश की सेवा से दूरी बनाना नहीं है। उनका कहना रहा है कि वह आगे भी किसी न किसी रूप में देश के लिए योगदान देना चाहते हैं। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर हैं कि 4 पैरा स्पेशल फोर्सेज और राष्ट्रपति भवन में जिम्मेदारी निभा चुके मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल अपने जीवन के अगले अध्याय में क्या भूमिका चुनते हैं।
वर्दी उतरी, लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई
मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल की कहानी केवल एक सैन्य अधिकारी के समयपूर्व रिटायरमेंट की कहानी नहीं है। यह उस अधिकारी के सफर की कहानी है जिसने गणतंत्र दिवस परेड से पहचान बनाई, 4 पैरा स्पेशल फोर्सेज में सेवा दी, राष्ट्रपति के ADC की प्रतिष्ठित जिम्मेदारी संभाली और फिर निजी परिस्थितियों के चलते सेना से विदाई का कठिन फैसला लिया।
राष्ट्रपति के साथ उनकी तस्वीरों ने उन्हें आम लोगों तक पहुंचाया, लेकिन उनकी पहचान के पीछे वर्षों का सैन्य प्रशिक्षण, अनुशासन और जिम्मेदारी रही है। अब जब सेना का अध्याय समाप्त हो चुका है, उनके अगले कदम का इंतजार उनके समर्थकों के साथ-साथ उन लोगों को भी रहेगा, जिन्होंने उन्हें राष्ट्रपति मुर्मू के साथ हर महत्वपूर्ण मौके पर बेहद सधे हुए अंदाज में देखा है।
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