
तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर कूटनीतिक चाल चलते हुए अमेरिका के सामने 14-सूत्रीय नया प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करना बताया जा रहा है। खास बात यह है कि ईरान ने इस योजना में सीधे तौर पर परमाणु मुद्दों को शामिल नहीं किया, लेकिन भविष्य में इस पर बातचीत के संकेत जरूर दिए हैं।
युद्ध खत्म करने पर फोकस, परमाणु मुद्दा फिलहाल अलग
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने 3 मई को साफ किया कि यह प्रस्ताव पूरी तरह से संघर्ष विराम और स्थायी शांति स्थापित करने के इरादे से तैयार किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस 14-सूत्रीय योजना में फिलहाल परमाणु कार्यक्रम को शामिल नहीं किया गया है।हालांकि कूटनीतिक हलकों में इसे एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि ईरान पहले युद्ध समाप्त करने और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत चाहता है, जिसके बाद वह परमाणु मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार हो सकता है।
अमेरिका पर दबाव बनाने की कोशिश
सूत्रों के मुताबिक, ईरान इस प्रस्ताव के जरिए अमेरिका पर अपने बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटाने का दबाव भी बना रहा है। यह कदम ईरान की आर्थिक स्थिति को सुधारने की दिशा में अहम माना जा रहा है।हालांकि, प्रस्ताव में कहीं भी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई ठोस रियायत देने को तैयार है या नहीं। यही वजह है कि इस प्रस्ताव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संशय बना हुआ है।
ट्रंप ने जताई अनिश्चितता
इस नए प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह प्रस्ताव का अध्ययन कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्हें इस बात का भरोसा नहीं है कि दोनों देशों के बीच कोई समझौता हो पाएगा।ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब उन्होंने एक दिन पहले ही पाकिस्तान की मध्यस्थता से मिले ईरान के पिछले प्रस्ताव पर निराशा जताई थी। इससे यह साफ संकेत मिलते हैं कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अब भी बनी हुई है।
क्या आगे बढ़ेगी बातचीत?
ईरान के इस नए प्रस्ताव को कूटनीतिक स्तर पर एक ‘ओपन डोर’ रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें तत्काल शांति और भविष्य में बड़े मुद्दों पर बातचीत की गुंजाइश छोड़ी गई है। अब नजर अमेरिका के अगले कदम पर टिकी है कि वह इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है या फिर तनाव और बढ़ता है।
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