UP Election 2026: यूपी चुनाव से पहले ‘ब्राह्मण अस्मिता’ पर गरमाई सियासत; 4 महीने, 10 विवाद और साजिश या संयोग का गहराता सवाल

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के साथ ही सूबे का सियासी पारा चढ़ने लगा है। इस बार राजनीति के केंद्र में ‘ब्राह्मण समुदाय’ से जुड़े एक के बाद एक सामने आ रहे विवाद हैं। पिछले चार महीनों के भीतर लगभग 10 ऐसे मामले सामने आए हैं, जिन्होंने न केवल ब्राह्मण समाज में उबाल पैदा किया है, बल्कि विपक्षी दलों को भी सरकार को घेरने का मौका दे दिया है। सियासी गलियारों में अब यह बहस छिड़ गई है कि क्या ये घटनाएं महज इत्तेफाक हैं या चुनाव से पहले किसी गहरी बिसात का हिस्सा?

विधायकों की ‘बैठकी’ से शुरू हुआ विवादों का सिलसिला

ब्राह्मण राजनीति में हलचल तब शुरू हुई जब यूपी विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा के 40 से ज्यादा ब्राह्मण विधायक एक साथ बैठे। इस बैठक की तस्वीर वायरल होते ही विपक्ष ने इसे सरकार से ब्राह्मणों की ‘नाराजगी’ का प्रतीक बताया। हालांकि विधायकों ने इसे सामान्य ‘बैठकी’ करार दिया, लेकिन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी द्वारा इस पर आपत्ति दर्ज कराने से मामला और बिगड़ गया। सवाल उठे कि जब अन्य जाति के विधायक साथ बैठते हैं, तब ऐसी नोटिस क्यों नहीं जारी होती?

‘घूसखोर पंडत’ फिल्म और ब्राह्मण अस्मिता की जंग

मनोज बाजपेयी स्टारर और नीरज पांडे की आने वाली फिल्म के नाम ‘घूसखोर पंडत’ ने आग में घी डालने का काम किया। ब्राह्मण संगठनों और कई विधायकों ने इसे सीधे तौर पर अपनी अस्मिता का अपमान बताया। विवाद इतना बढ़ा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप के बाद लखनऊ में एफआईआर दर्ज की गई। आखिरकार, भारी विरोध और ब्राह्मण संगठनों के सड़कों पर उतरने के बाद निर्माताओं को फिल्म का नाम बदलने की घोषणा करनी पड़ी।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और ‘बटुक’ विवाद

माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को रथ पर सवार होकर संगम स्नान से रोकने के प्रशासन के फैसले ने एक नया मोर्चा खोल दिया। स्वामी जी ने इसे शंकराचार्य का अपमान बताते हुए धरने की चेतावनी दी। इसी बीच एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें एक पुलिसकर्मी एक ‘बटुक’ (युवा ब्राह्मण विद्यार्थी) की शिखा खींचता नजर आया। इस घटना ने ब्राह्मण समाज में तीव्र आक्रोश पैदा कर दिया, जिसे शांत करने के लिए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को खुद बटुक पूजा कर डैमेज कंट्रोल की कोशिश करनी पड़ी।

परीक्षा पेपरों में ‘पंडित’ शब्द पर मचा घमासान

ब्राह्मणों की नाराजगी की हालिया वजह पुलिस भर्ती परीक्षा और परिषदीय स्कूलों के पेपर बने हैं। इन परीक्षाओं में ‘पंडित’ शब्द से जुड़े कुछ विवादास्पद सवालों ने शिक्षित ब्राह्मण युवाओं को नाराज कर दिया है। यूजीसी की नई गाइडलाइंस को लेकर भी ब्राह्मण समाज के बुद्धिजीवियों ने आपत्ति जताई है। चुनाव से ठीक पहले इन विवादों का एक साथ सामने आना सत्तापक्ष के लिए सिरदर्द साबित हो रहा है, वहीं विपक्ष इसे ‘ब्राह्मण उत्पीड़न’ का मुद्दा बनाकर भुनाने में जुटा है।

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