
जकार्ता: एशिया में रक्षा संतुलन को प्रभावित करने वाला एक बड़ा रक्षा समझौता सामने आया है। इंडोनेशिया ने तुर्की के साथ अत्याधुनिक मानवरहित लड़ाकू विमान (UCAV) खरीदने की डील फाइनल कर ली है। इस समझौते के तहत इंडोनेशिया को तुर्की के चर्चित किजिलेल्मा UCAV मिलेंगे। खास बात यह है कि इंडोनेशिया इन विमानों का पहला विदेशी ग्राहक बन गया है। माना जा रहा है कि इस सौदे से दक्षिण-पूर्व एशिया में एयर पावर के समीकरण बदल सकते हैं। भारत भी अपने पड़ोसी क्षेत्र में हो रहे इस तेजी से बदलते सैन्य घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है।
तुर्की का एशिया में बढ़ता दखल
तुर्की लगातार एशियाई देशों के साथ रक्षा साझेदारी मजबूत करने में जुटा हुआ है। इंडोनेशिया के साथ यह नई डील उसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। इससे पहले भी इंडोनेशिया तुर्की के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान KAAN को लेकर समझौता कर चुका है। अब UCAV डील के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और मजबूत हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तुर्की एशिया में अपनी सैन्य तकनीक और रक्षा निर्यात के जरिए प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। तुर्की का पाकिस्तान के प्रति नरम रुख पहले से ही भारत के लिए चिंता का विषय रहा है। ऐसे में इंडोनेशिया के साथ यह साझेदारी क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को नया मोड़ दे सकती है।
12 किजिलेल्मा विमानों का समझौता
रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्की की प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी बायकर और इंडोनेशियाई रक्षा समूह रिपब्लिक कोर्प के बीच 6 मई को समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस डील के तहत इंडोनेशिया को 12 किजिलेल्मा मानवरहित लड़ाकू विमान दिए जाएंगे।
यह किजिलेल्मा UCAV के लिए पहला अंतरराष्ट्रीय एक्सपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट माना जा रहा है। बायकर ने इस विमान को दुनिया के पहले आधुनिक मानवरहित लड़ाकू विमान के रूप में पेश किया है।
क्या है किजिलेल्मा UCAV की खासियत?
किजिलेल्मा UCAV को अत्याधुनिक तकनीक से लैस बताया जा रहा है। यह विमान बिना पायलट के लंबी दूरी तक मिशन पूरा करने में सक्षम है। इसमें हाई-स्पीड ऑपरेशन, एयर-टू-एयर कॉम्बैट और स्मार्ट वेपन सिस्टम जैसी क्षमताएं शामिल हैं।रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य के युद्धों में मानव रहित लड़ाकू विमानों की भूमिका तेजी से बढ़ने वाली है। ऐसे में इंडोनेशिया का यह कदम उसकी वायुसेना की ताकत को नई दिशा दे सकता है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह डील?
भारत के रणनीतिक विश्लेषक इस डील को सिर्फ एक रक्षा खरीद नहीं बल्कि एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के रूप में देख रहे हैं। तुर्की और पाकिस्तान के करीबी रिश्ते पहले से चर्चा में रहे हैं। अब इंडोनेशिया के साथ बढ़ती सैन्य साझेदारी से क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में ड्रोन और UCAV तकनीक आधुनिक युद्ध का सबसे बड़ा हथियार बन सकती है। ऐसे में एशिया में तुर्की की बढ़ती मौजूदगी भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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