मुसीबत में घिरे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: वाराणसी पहुंच सकती है प्रयागराज पुलिस, POCSO एक्ट के तहत गिरफ्तारी की तलवार!

प्रयागराज/वाराणसी। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। नाबालिगों के यौन शोषण जैसे गंभीर आरोपों में घिरे शंकराचार्य के खिलाफ अब कानून का शिकंजा कसता नजर आ रहा है। ताजा अपडेट के मुताबिक, प्रयागराज पुलिस की एक टीम आज वाराणसी पहुंच सकती है, जहां स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों से कड़ी पूछताछ होने की संभावना है। इस मामले में पुलिस गिरफ्तारी जैसा बड़ा कदम भी उठा सकती है।

POCSO एक्ट और गंभीर धाराओं में केस दर्ज

यह पूरा विवाद तब गहराया जब प्रयागराज के झूंसी थाने में कोर्ट के आदेश पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने उन पर पद और शक्ति का दुरुपयोग कर नाबालिगों के यौन शोषण का आरोप लगाया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो (POCSO) एक्ट की कई संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है, जिनमें दोषी पाए जाने पर 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।

शंकराचार्य का पलटवार: “ये रामभद्राचार्य की साजिश”

वहीं, इन आरोपों को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पूरी तरह सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य पर निशाना साधते हुए कहा कि यह उनके खिलाफ रची गई एक झूठी साजिश है। शंकराचार्य ने शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी को ‘हिस्ट्रीशीटर’ बताते हुए कहा कि जो कहानी गढ़ी गई है, वह जल्द ही झूठ साबित होगी। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “असली अदालत जनता की है और हम जनता की अदालत में अपनी बात रखेंगे।”

वाराणसी से प्रयागराज तक कानूनी हलचल

शंकराचार्य के वकील मदन मिश्रा के अनुसार, पुलिस किसी भी वक्त पूछताछ के लिए आ सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चूंकि मुकदमा प्रयागराज के झूंसी में दर्ज है, जो वाराणसी आश्रम से करीब 80 किलोमीटर दूर है, इसलिए गिरफ्तारी की स्थिति में पुलिस को मजिस्ट्रेट से ‘ट्रांजिट रिमांड’ या जर्नी वारंट लेना होगा। वकील का कहना है कि स्वामी जी कानून का सम्मान करते हैं और गिरफ्तारी देने के लिए तैयार हैं, हालांकि वे इस मामले में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के कानूनी विशेषज्ञों से भी सलाह ले रहे हैं।

क्या हैं आरोप और कितनी हो सकती है सजा?

पुलिस ने इस मामले में धारा 351(3) के तहत दबाव बनाने और पॉक्सो की धाराओं 3, 4, 5, 6, 16 और 17 के तहत केस दर्ज किया है।

  • धारा 5(i): पद या शक्ति का गलत इस्तेमाल कर यौन अपराध।

  • धारा 6: आरोप सिद्ध होने पर 20 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा।

  • धारा 17: अपराध के लिए उकसाने या मदद करने पर कड़ी सजा का प्रावधान।

फिलहाल, वाराणसी और प्रयागराज के धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में इस खबर ने हलचल मचा दी है। पुलिस की अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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