नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्रीय साझेदारी का भविष्य किसी देश के आकार या शक्ति से नहीं, बल्कि आपसी सम्मान, विश्वास और समान भागीदारी से तय होगा। सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने हिंद महासागर क्षेत्र को सुरक्षित, स्थिर और आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।
हिंद महासागर को बताया साझा अवसरों का क्षेत्र
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हिंद महासागर केवल समुद्री सीमा नहीं, बल्कि साझा अवसरों और विकास का केंद्र है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना सभी साझेदार देशों की सामूहिक जिम्मेदारी है। भारत और सेशेल्स इस दिशा में सहयोग को और मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास करेंगे।
आर्थिक सहयोग और कनेक्टिविटी बढ़ाने पर बनी सहमति
दोनों देशों के बीच बातचीत में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आर्थिक सहयोग, समुद्री सुरक्षा और कनेक्टिविटी को नई गति देने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में क्षेत्रीय विकास के लिए मजबूत और भरोसेमंद साझेदारी बेहद महत्वपूर्ण है।
‘विजन महासागर’ और ग्लोबल साउथ पर भारत का फोकस
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ‘विजन महासागर’ पहल और ‘ग्लोबल साउथ’ की प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत विकासशील देशों के साथ समानता और विश्वास के आधार पर सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भारत की यह नीति क्षेत्रीय समृद्धि और साझा विकास को नई दिशा देने का काम करेगी।
भारत-सेशेल्स संबंधों को मिलेगा नया आयाम
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत और सेशेल्स के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक, रणनीतिक और मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों देशों ने भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का दायरा बढ़ाने और साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
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