
नई दिल्ली: भारत ने पूर्वी भारत के बेहद संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चिकन नेक कॉरिडोर में रेलवे कनेक्टिविटी मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इस अहम रेल सेक्शन में चौथी रेलवे लाइन बिछाने को मंजूरी दे दी है। यह इलाका बांग्लादेश की सीमा के बेहद करीब है और इसी संकरे भू-भाग से होकर पूर्वोत्तर भारत देश के बाकी हिस्सों से जुड़ा हुआ है। रेलवे के इस विस्तार को रणनीतिक और परिवहन, दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पूर्वोत्तर को जोड़ने वाले अहम रेल मार्ग पर बढ़ेगी क्षमता
चिकन नेक कॉरिडोर को आधिकारिक तौर पर सिलीगुड़ी कॉरिडोर भी कहा जाता है। यह पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी क्षेत्र के आसपास स्थित संकरा भू-भाग है, जो पूर्वोत्तर राज्यों को भारत के शेष हिस्से से जोड़ने वाला प्रमुख और एकमात्र जमीनी संपर्क मार्ग है। ऐसे में इस क्षेत्र में रेलवे की क्षमता बढ़ाने का सीधा असर पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी पर पड़ सकता है।
नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) के जनरल मैनेजर चेतन कुमार श्रीवास्तव ने बिहार के कटिहार में इस रेल सेक्शन की अहमियत बताते हुए कहा कि मालदा-न्यू जलपाईगुड़ी सेक्शन पूर्वोत्तर भारत को देश के दूसरे हिस्सों से जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पहले तीसरी लाइन का था प्रस्ताव, अब चौथी को भी हरी झंडी
रेलवे के मुताबिक, चिकन नेक कॉरिडोर के इस हिस्से में पहले तीसरी रेल लाइन विकसित करने का प्रस्ताव था। हालांकि अब सरकार ने इससे आगे बढ़ते हुए चौथी लाइन को भी मंजूरी दे दी है। NFR के जीएम ने बुधवार रात आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि इस सेक्शन के लिए पहले तीसरी लाइन का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन अब चौथी लाइन को भी स्वीकृति मिल चुकी है। इससे आने वाले समय में इस महत्वपूर्ण रेल मार्ग की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
29 किलोमीटर का अंडरग्राउंड डबल लाइन प्रोजेक्ट भी अहम
चिकन नेक क्षेत्र में सिर्फ अतिरिक्त रेलवे लाइन ही नहीं, बल्कि एक और महत्वपूर्ण परियोजना पर भी काम किया जा रहा है। रेलवे के अनुसार, करीब 29 किलोमीटर लंबा अंडरग्राउंड डबल लाइन प्रोजेक्ट बागडोगरा तक प्रस्तावित है।
रेलवे के अधिकारियों ने इसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पहल बताया है। इस तरह एक ही क्षेत्र में नई रेल लाइनों, दोहरीकरण और भूमिगत रेल परियोजनाओं पर काम होने से पूरे रेल नेटवर्क की क्षमता और परिचालन व्यवस्था में बदलाव आने की उम्मीद है।
बारसोई सेक्शन में भी तेजी से चल रहा दोहरीकरण
चिकन नेक कॉरिडोर से जुड़े रेल नेटवर्क में बारसोई सेक्शन भी महत्वपूर्ण है। यहां रेलवे की ओर से दोहरीकरण का काम तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद इस पूरे इलाके के रेल नेटवर्क में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
चेतन कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक, परियोजनाओं के पूरा होने के बाद क्षेत्र के रेलवे नेटवर्क का कायाकल्प हो जाएगा। इससे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस रेल मार्ग की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ ट्रेनों के संचालन को भी बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
क्यों महत्वपूर्ण है चिकन नेक कॉरिडोर?
सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के नक्शे पर बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह संकरा भू-भाग देश के पूर्वोत्तर हिस्से को मुख्य भूमि से जोड़ता है। इसी वजह से यहां सड़क और रेलवे, दोनों तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना रणनीतिक दृष्टि से अहम माना जाता है।
रेलवे की नई परियोजनाओं का उद्देश्य इस महत्वपूर्ण मार्ग पर परिवहन क्षमता को बढ़ाना है। चौथी रेल लाइन की मंजूरी, 29 किलोमीटर के अंडरग्राउंड डबल लाइन प्रोजेक्ट और बारसोई सेक्शन के दोहरीकरण जैसे काम पूरे होने के बाद पूर्वोत्तर से आने-जाने वाले रेल नेटवर्क को और मजबूत आधार मिल सकता है।
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