Nepal Flood Alert: तबाही के बाद फिर बढ़ा बाढ़ का खतरा, नदियों का जलस्तर चढ़ा; चितवन में मिले 321 शव

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से अभी राहत नहीं मिली है। एक तरफ मलबे और नदियों से शवों की बरामदगी जारी है, तो दूसरी तरफ कई इलाकों में फिर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है।

काठमांडू। नेपाल में कुछ दिन पहले आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात अब भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। सुरक्षा एजेंसियों की ओर से चलाए जा रहे तलाशी और बचाव अभियान में लगातार शव बरामद हो रहे हैं। 1 सितंबर तक नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 987 हो गई है, जबकि करीब 3,916 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

चितवन में सबसे ज्यादा 321 शव बरामद

आपदा के बाद अलग-अलग इलाकों में शवों की बरामदगी का सिलसिला जारी है। नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, चितवन में सबसे अधिक 321 शव बरामद किए गए हैं। इसके बाद नवलपरासी पूर्व में 216, नवलपरासी पश्चिम में 170 और नुवाकोट में 95 शव मिले हैं।

इसके अलावा गोरखा में 65, धादिंग में 55, तनहूं में 38 और रसुवा में 27 शव बरामद किए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक बाढ़ से प्रभावित इलाकों में तलाशी अभियान अभी भी जारी है और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए सुरक्षा बल लगातार प्रयास कर रहे हैं।

मौतों का आंकड़ा 1 हजार के पार, हजारों लोग अब भी लापता

नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र को मिलाकर इस आपदा में मौतों का आंकड़ा 1,000 के पार पहुंच चुका है। नेपाल में अकेले मृतकों की संख्या 987 बताई गई है, जबकि हजारों लोग अभी भी लापता हैं। लगातार शव मिलने के कारण मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

बाढ़ के बाद राहत और बचाव कार्य में बड़ी संख्या में सुरक्षा कर्मियों को लगाया गया है। अधिकारियों के अनुसार अब तक 11 हजार से अधिक लोगों को प्रभावित इलाकों से सुरक्षित निकाला जा चुका है। कई स्थानों पर सड़कें और संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत दलों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

सात जिलों में फिर बाढ़ का खतरा

पुरानी तबाही से उबरने की कोशिश कर रहे नेपाल के सामने अब एक और चुनौती खड़ी हो गई है। नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद देश के कई हिस्सों में दोबारा बाढ़ की आशंका जताई गई है। अधिकारियों ने पूर्वी, मध्य और पश्चिमी हिस्सों के संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने तथा जरूरी एहतियाती कदम उठाने को कहा गया है।

स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहूं, नवलपरासी और चितवन जैसे प्रभावित जिलों में नदी किनारे बसे इलाकों पर खास नजर रखी जा रही है। ऐसे में पहले से बाढ़ की मार झेल चुके क्षेत्रों में नए सिरे से खतरे ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

ग्लेशियर टूटने के बाद मची थी भीषण तबाही

नेपाल में यह आपदा 26 अगस्त को शुरू हुई थी। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर से जुड़ी घटना के बाद अचानक भारी मात्रा में पानी, बर्फ, चट्टान और मलबा नीचे की ओर आया। इसके बाद नेपाल के कई हिस्सों में बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई। कई सड़कें, पुल, बिजली और संचार ढांचे प्रभावित हुए और दूरदराज के इलाकों का संपर्क टूट गया।

सबसे ज्यादा मुश्किल उन इलाकों में है जहां जलविद्युत परियोजनाओं के कर्मचारी और मजदूर फंसे हुए हैं। राहत दल कई परियोजना स्थलों तक पहुंचकर लोगों को निकालने में जुटे हैं। नेपाल, भारत और चीन की टीमें कुछ स्थानों पर मिलकर बचाव अभियान चला रही हैं।

शवों की पहचान बनी बड़ी चुनौती

बड़ी संख्या में शव मिलने के बाद उनकी पहचान करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। नेपाल में कई शवों की पहचान अभी नहीं हो सकी है। ऐसे मामलों में डीएनए जांच और अन्य फोरेंसिक तरीकों का सहारा लिया जा रहा है।

भारतीय नागरिकों समेत विदेशी नागरिकों के शवों की पहचान और उन्हें उनके परिजनों तक पहुंचाने के लिए भी प्रक्रिया शुरू की गई है। भारतीय दूतावास ने परिजनों को डीएनए नमूने और जरूरी दस्तावेजों के जरिए पहचान प्रक्रिया में सहयोग करने की जानकारी दी है।

राहत अभियान के बीच मौसम ने बढ़ाई चिंता

नेपाल में राहत और बचाव अभियान अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कई इलाकों में मलबा हटाने, लापता लोगों की तलाश और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने का काम जारी है। वहीं नदियों के बढ़ते जलस्तर और दोबारा बाढ़ के खतरे ने बचाव दलों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे और अन्य संवेदनशील इलाकों में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और नए संभावित बाढ़ क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित रखना है।

नोट: यह खबर 1 सितंबर 2026 तक उपलब्ध ताजा आधिकारिक और विश्वसनीय रिपोर्टों के आधार पर अपडेट की गई है।

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