मिर्ज़ापुर की धरती पर विराजती हैं माँ विंध्यवासिनी: 51 शक्तिपीठों में शामिल इस धाम में नवरात्र पर उमड़ता है आस्था का सैलाब

उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर जिले में गंगा तट पर स्थित विंध्याचल धाम में विराजमान माँ विंध्यवासिनी को देश के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थान न केवल अत्यंत प्राचीन है बल्कि यहां मां की शक्ति आज भी जागृत मानी जाती है। पूर्वांचल और बिहार के लाखों श्रद्धालुओं के लिए यह धाम कुलदेवी के रूप में विशेष आस्था का केंद्र है, जहां साल भर भक्तों का तांता लगा रहता है।

गंगा किनारे स्थित है अद्भुत शक्तिपीठ

विंध्याचल, वाराणसी से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह पावन स्थल गंगा नदी के किनारे बसा हुआ है, जहां दर्शन के साथ गंगा स्नान का भी विशेष महत्व माना जाता है। यहां पहुंचना भी बेहद आसान है, क्योंकि विंध्याचल रेलवे स्टेशन प्रमुख रेल मार्ग पर स्थित है, जबकि नजदीकी हवाई अड्डा वाराणसी में है।

51 शक्तिपीठों में खास स्थान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां विंध्यवासिनी का यह धाम 51 शक्तिपीठों में शामिल है। कहा जाता है कि यहां माता सती के दाहिने पैर का अंगूठा गिरा था। इसी कारण इस स्थान की महत्ता और भी बढ़ जाती है। भक्तों का विश्वास है कि यहां स्वयं आदिशक्ति महालक्ष्मी विंध्यवासिनी के रूप में विराजमान हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।

बाल रूप में विराजती हैं मां

मां विंध्यवासिनी को योगमाया का स्वरूप माना जाता है, जो भगवान विष्णु की दिव्य शक्ति का अवतार हैं। धार्मिक कथा के अनुसार, जब भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था, उसी समय योगमाया ने भी यशोदा के घर जन्म लिया था। कंस द्वारा उन्हें मारने का प्रयास किया गया, लेकिन वे बचकर विंध्याचल पर्वत पर आकर स्थापित हो गईं।

त्रिकोण दर्शन का विशेष महत्व

विंध्याचल में ‘त्रिकोण दर्शन’ की परंपरा बेहद प्रसिद्ध है। इसमें तीन प्रमुख मंदिरों—विंध्यवासिनी देवी मंदिर, कालीखोह मंदिर और अष्टभुजा देवी मंदिर—के दर्शन को पूर्ण माना जाता है। श्रद्धालु मानते हैं कि इन तीनों स्थलों के दर्शन से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

नवरात्र में उमड़ती है भक्तों की भीड़

विंध्याचल धाम में साल भर श्रद्धालु आते हैं, लेकिन वासंती और शारदीय नवरात्र के दौरान यहां भव्य मेले का आयोजन होता है। इस दौरान लाखों की संख्या में भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में रात भर पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब जाता है।

गंगा स्नान का भी है विशेष महत्व

मां विंध्यवासिनी के दर्शन के साथ गंगा स्नान करना अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है। श्रद्धालु पहले गंगा में स्नान करते हैं और फिर मंदिर में जाकर मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। स्थानीय लोग श्रद्धा से मां को ‘विंध्याचल माई’ कहकर पुकारते हैं।

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