
नई दिल्ली। भारतीय नौसेना 3 अप्रैल, 2026 को अपनी समुद्री शक्ति में एक और बड़ा अध्याय जोड़ने जा रही है। इस दिन स्वदेशी तकनीक से तैयार अत्याधुनिक स्टील्थ युद्धपोत ‘तारागिरी’ को आधिकारिक तौर पर नौसेना में शामिल किया जाएगा। यह सिर्फ एक युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा आत्मनिर्भरता और समुद्री प्रभुत्व का मजबूत प्रतीक माना जा रहा है।
‘द डेयरिंग ईगल’ के नाम से दी गई पहचान
नौसेना के प्रवक्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए इस खास मौके को ‘द डेयरिंग ईगल’ नाम दिया है। उन्होंने बताया कि यह कमीशनिंग समारोह भारतीय नौसेना की ताकत और आत्मनिर्भर भारत के विजन को नई ऊंचाई देगा। 3 अप्रैल को जब यह युद्धपोत सेवा में आएगा, तो उसका संचालन करने वाला क्रू गर्व के साथ इसे समुद्र में उतारेगा।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
तारागिरी युद्धपोत को पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित किया गया है, जो भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक अहम उपलब्धि है। नौसेना के अनुसार, इस युद्धपोत के शामिल होने से देश की समुद्री सुरक्षा और निगरानी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह कदम भारत को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करने में भी मदद करेगा।
विशाखापत्तनम में होगा भव्य समारोह
तारागिरी (F41) युद्धपोत को भारतीय नौसेना को सौंपने का कार्यक्रम विशाखापत्तनम में आयोजित किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। समारोह में नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी और रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई गणमान्य व्यक्ति भी शामिल होंगे।
समुद्री संप्रभुता को मिलेगी नई मजबूती
नौसेना का मानना है कि तारागिरी का शामिल होना भारत की समुद्री संप्रभुता को और अधिक सुदृढ़ करेगा। अत्याधुनिक स्टील्थ तकनीक से लैस यह युद्धपोत दुश्मनों की नजर से बचते हुए सटीक ऑपरेशन करने में सक्षम होगा। इसके जरिए हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति और भी मजबूत होगी।
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