
गोरखपुर: उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में योगी आदित्यनाथ सरकार की पहल असर दिखाने लगी है। डेयरी से जुड़ी महिलाओं को अब दोहरा फायदा मिल रहा है—एक ओर दूध से आमदनी बढ़ रही है तो दूसरी ओर गोबर से तैयार बायोगैस उनके घर की रसोई को मुफ्त ईंधन उपलब्ध करा रही है। इस पहल से हजारों परिवारों की जिंदगी में बदलाव दर्ज किया जा रहा है।
डेयरी से आत्मनिर्भरता, बायोगैस से राहत
उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित ‘श्री बाबा गोरखनाथ कृपा मिल्क प्रोड्यूसर्स ऑर्गनाइजेशन’ से जुड़ी महिलाएं अब आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। इस संगठन की सदस्य और शेयरहोल्डर बनी महिलाओं ने डेयरी कार्य को न केवल आय का मजबूत जरिया बनाया है, बल्कि घरेलू खर्च में भी कमी लाई है। अब उनकी रसोई में गोबर गैस से खाना बन रहा है, जिससे गैस सिलेंडर पर होने वाला खर्च लगभग खत्म हो गया है।
100 घरों में शुरू हुआ बायोगैस प्लांट
नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के सहयोग से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरुआती चरण में 100 महिलाओं के घरों में घरेलू बायोगैस प्लांट लगाए गए हैं। इन प्लांट्स से निकलने वाली गैस का उपयोग सीधे रसोई में किया जा रहा है। वहीं, प्लांट से निकलने वाला अवशेष जैविक खाद के रूप में खेतों में इस्तेमाल हो रहा है, जिससे खेती की लागत भी घट रही है।
हर घर तक पहुंचाने का लक्ष्य
मिल्क प्रोड्यूसर्स ऑर्गनाइजेशन का लक्ष्य है कि हर सदस्य महिला के घर बायोगैस प्लांट स्थापित किया जाए। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग भी बढ़ेगा। इस योजना के जरिए महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ उन्हें ऊर्जा के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
सीएम योगी के विजन से मिली दिशा
इस पहल की नींव योगी आदित्यनाथ के विजन पर रखी गई है। वर्ष 2019 में बुंदेलखंड क्षेत्र में ‘बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर्स कंपनी’ से जुड़ी महिलाओं की सफलता को देखते हुए इस मॉडल को अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया गया। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और डेयरी सेक्टर में उनके योगदान ने इस योजना को नई पहचान दी है।
ग्रामीण महिलाओं की बदलती तस्वीर
इस पहल ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। अब वे केवल परिवार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आर्थिक फैसलों में भी अपनी भूमिका निभा रही हैं। दूध उत्पादन, गैस निर्माण और जैविक खेती जैसे कार्यों ने उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाया है।
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