उत्तर प्रदेश में जनप्रतिनिधियों के सम्मान और सरकारी अधिकारियों के व्यवहार को लेकर योगी सरकार ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा विधायक, सांसद, मंत्री या अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में शासन की ओर से नया शासनादेश जारी कर सभी विभागों को निर्देश भेज दिए गए हैं।
अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त निर्देश
जारी शासनादेश में कहा गया है कि जनप्रतिनिधि जनता और सरकार के बीच महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। ऐसे में उनके साथ संवाद, बैठक या सरकारी कार्यों के दौरान अधिकारियों का व्यवहार पूरी तरह शिष्ट और मर्यादित होना चाहिए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही, अभद्रता या उपेक्षापूर्ण रवैया सामने आता है तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली के तहत सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
सरकार का मानना है कि कई बार जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए जनहित के मामलों को गंभीरता से नहीं लिया जाता, जिससे जनता में भी नाराजगी पैदा होती है। इसी को देखते हुए प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की दिशा में यह कदम उठाया गया है।
जनप्रतिनिधियों की शिकायतों के बाद सरकार हुई सख्त
सूत्रों के मुताबिक, बीते कुछ समय से कई जनप्रतिनिधियों की ओर से शिकायतें मिल रही थीं कि अधिकारी फोन रिसीव नहीं करते, बैठकों में उचित व्यवहार नहीं करते या विकास कार्यों से जुड़े मामलों में अपेक्षित सहयोग नहीं देते। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों के लिए स्पष्ट गाइडलाइन तय कर दी है।
सरकार ने यह भी कहा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुने हुए प्रतिनिधियों का सम्मान बनाए रखना प्रशासनिक जिम्मेदारी का अहम हिस्सा है। ऐसे में किसी भी स्तर पर लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सभी विभागों को भेजा गया शासनादेश
शासन स्तर से जारी आदेश सभी विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दिया गया है। निर्देश दिया गया है कि जनप्रतिनिधियों के पत्रों, फोन कॉल और जनसमस्याओं से जुड़े मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
इसके साथ ही अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि सरकारी बैठकों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों के प्रोटोकॉल और गरिमा का विशेष ध्यान रखा जाए।
प्रशासनिक कार्यशैली में सुधार की कोशिश
राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस फैसले को प्रशासनिक कार्यशैली में सुधार और जवाबदेही तय करने की बड़ी पहल माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और जनता से जुड़े मामलों के समाधान में तेजी आएगी।
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