
ऑपरेशन सिंदूर में दिखी ब्रह्मोस की असली ताकत
ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरे होने पर ब्रह्मोस मिसाइल की ऑपरेशनल क्षमता को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। ब्रह्मोस एयरोस्पेस के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. जयतीर्थ जोशी ने स्पुतनिक इंडिया से बातचीत में बताया कि मिसाइल ने बेहद कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य को सटीकता से ध्वस्त किया। उन्होंने कहा कि इसकी सुपरसोनिक स्पीड, लो-ऑब्जर्वेबल स्टील्थ तकनीक और पिनपॉइंट अटैक क्षमता इसे दुनिया की सबसे खतरनाक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में शामिल करती है।
हर टारगेट पर सटीक वार, दुश्मन को संभलने का मौका नहीं
डॉ. जोशी के मुताबिक ऑपरेशन के दौरान ब्रह्मोस को जो भी लक्ष्य दिए गए, उसने उन्हें पूरी सटीकता के साथ नष्ट किया। इसकी हाई स्पीड के कारण दुश्मन को प्रतिक्रिया देने का समय तक नहीं मिला। यही वजह है कि ब्रह्मोस की विश्वसनीयता लगातार बढ़ती जा रही है और कई देश इसे अपने रक्षा सिस्टम का हिस्सा बनाना चाहते हैं।
एशियाई देशों में बढ़ी ब्रह्मोस की मांग
भारत की इस मिसाइल प्रणाली को लेकर एशियाई देशों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। सूत्रों के मुताबिक वियतनाम समेत कई देश ब्रह्मोस खरीदने को लेकर गंभीर चर्चा कर रहे हैं। इसी कड़ी में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 18 मई को वियतनाम और 20 मई को दक्षिण कोरिया के दौरे पर जाएंगे। माना जा रहा है कि इन दौरों के दौरान रक्षा सहयोग और ब्रह्मोस निर्यात से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है।
क्यों खास है ब्रह्मोस मिसाइल?
ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है। यह जमीन, समुद्र और हवा तीनों प्लेटफॉर्म से लॉन्च की जा सकती है। इसकी रफ्तार ध्वनि की गति से करीब तीन गुना ज्यादा बताई जाती है। यही कारण है कि इसे इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल माना जाता है। आधुनिक तकनीक और घातक क्षमता के कारण ब्रह्मोस भारतीय सेना की सबसे बड़ी ताकतों में शामिल हो चुकी है।
भारत की रक्षा ताकत को मिला बड़ा वैश्विक भरोसा
ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस की सफलता ने भारत की रक्षा तकनीक पर वैश्विक भरोसा और मजबूत किया है। रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में भारत रक्षा निर्यात के क्षेत्र में बड़ी ताकत बनकर उभर सकता है और ब्रह्मोस इसमें अहम भूमिका निभाएगी।
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