ईरान युद्ध पर फूटा अमेरिका के टॉप अधिकारी का गुस्सा: काउंटर-टेररिज्म चीफ का इस्तीफा, बोले—‘इजरायल के दबाव में ट्रंप ने लिया फैसला’

अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था के शीर्ष स्तर पर बड़ा भूचाल देखने को मिला है। देश के राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी ढांचे के प्रमुख अधिकारी ने अचानक इस्तीफा देकर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर के निदेशक जो केंट ने साफ कहा कि वह ईरान के खिलाफ छेड़े गए युद्ध का समर्थन नहीं कर सकते, क्योंकि उनके मुताबिक अमेरिका को तत्काल कोई खतरा नहीं था।

इस्तीफे के पीछे क्या है असली वजह

मंगलवार को अपने पद से हटने का ऐलान करते हुए केंट ने कहा कि उनका अंतर्मन इस सैन्य कार्रवाई का समर्थन करने की इजाजत नहीं देता। उन्होंने खुलकर आरोप लगाया कि ईरान के खिलाफ यह युद्ध अमेरिका की जरूरत नहीं, बल्कि इजरायल और उससे जुड़ी प्रभावशाली लॉबी के दबाव का नतीजा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य-पूर्व की स्थिति पहले से ही बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है।

‘ईरान से कोई तात्कालिक खतरा नहीं था’

केंट ने अपने बयान में दो टूक कहा कि ईरान से अमेरिका को कोई तत्काल सुरक्षा खतरा नहीं था। ऐसे में सैन्य कार्रवाई को उचित ठहराना मुश्किल है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि खुफिया एजेंसियों के विश्लेषण और राजनीतिक फैसलों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है।

ट्रंप समर्थकों के बीच भी बढ़ी बेचैनी

केंट का इस्तीफा केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि अमेरिकी राजनीति में गहराते मतभेदों का संकेत माना जा रहा है। खास बात यह है कि डोनाल्ड ट्रंप के अपने समर्थकों के बीच भी इस युद्ध को लेकर असहजता बढ़ रही है। दक्षिणपंथी खेमे के भीतर भी अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह फैसला रणनीतिक था या दबाव में लिया गया कदम।

क्या इजरायल ने डाला दबाव?

हालांकि ट्रंप प्रशासन लगातार इन आरोपों से इनकार करता रहा है कि इजरायल ने अमेरिका को युद्ध के लिए मजबूर किया। इस बीच, अमेरिकी संसद में भी इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने संकेत दिया कि हालात ऐसे बन गए थे कि व्हाइट हाउस के सामने बेहद कठिन फैसला खड़ा हो गया था।

खुफिया एजेंसी की भूमिका पर भी सवाल

नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर जैसी अहम एजेंसी का काम आतंकवादी खतरों का विश्लेषण करना और समय रहते चेतावनी देना होता है। ऐसे में उसके प्रमुख का इस्तीफा यह संकेत देता है कि अंदरखाने नीतिगत असहमति काफी गहरी थी। इससे यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या खुफिया रिपोर्ट्स को नजरअंदाज किया गया।

वैश्विक राजनीति पर पड़ेगा असर

इस घटनाक्रम का असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर वैश्विक राजनीति, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह इस्तीफा आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों का संकेत हो सकता है।

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