
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने पुणे में लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार ग्रहण करते हुए कहा कि आजादी का मतलब मनमानी नहीं है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने और स्वतंत्रता के वास्तविक अर्थ को समझने की अपील की।
पुणे। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने शनिवार को स्वतंत्रता, राष्ट्रहित और युवाओं की जिम्मेदारियों को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। पुणे में आयोजित लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में सम्मानित किए जाने के बाद उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को यह समझना होगा कि आजादी का अर्थ केवल अपनी इच्छा के अनुसार कुछ भी करने की छूट नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता लंबे संघर्ष, बलिदान और ऐतिहासिक प्रयासों का परिणाम है, इसलिए इसके वास्तविक महत्व को समझना बेहद जरूरी है।
इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अजीत डोभाल को लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया। समारोह के दौरान उन्हें पारंपरिक पुणेरी पगड़ी भी पहनाई गई।
‘स्वतंत्रता के पीछे है लंबा संघर्ष, इसे समझना होगा’
सम्मान ग्रहण करने के बाद अपने संबोधन में अजीत डोभाल ने कहा कि कई युवा आजादी को केवल अपनी पसंद के मुताबिक जीवन जीने या मनमानी करने की स्वतंत्रता के रूप में देखते हैं, जबकि इसका वास्तविक अर्थ इससे कहीं अधिक व्यापक है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, त्याग और बलिदान का परिणाम है। ऐसे में नई पीढ़ी को इस इतिहास से परिचित कराना और स्वतंत्रता की सही भावना समझाना समय की आवश्यकता है।
युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की अपील
NSA डोभाल ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि यदि कभी व्यक्तिगत हित और राष्ट्रीय हित के बीच चुनाव की स्थिति आए तो राष्ट्रहित को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि युवा इसी सोच के साथ आगे बढ़ेंगे तो भारत अपने राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करेगा और इतिहास में नई उपलब्धियां दर्ज करेगा।
अभिव्यक्ति की आजादी पर चल रही बहस के बीच आया बयान
अजीत डोभाल का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब हाल के दिनों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उसकी सीमाओं को लेकर देशभर में चर्चा तेज है। जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान वायरल हुए कुछ वीडियो और छात्रों की टिप्पणियों के बाद स्वतंत्रता और जिम्मेदारी के संतुलन पर व्यापक बहस छिड़ी हुई है। हालांकि डोभाल ने अपने संबोधन में किसी विशेष घटना का उल्लेख नहीं किया, लेकिन उनका संदेश स्वतंत्रता के जिम्मेदार उपयोग पर केंद्रित रहा।
अमित शाह बोले- मोदी सरकार का पहला बड़ा रणनीतिक फैसला था डोभाल की नियुक्ति
समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी द्वारा लिए गए शुरुआती महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक अजीत डोभाल को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त करना था। शाह ने कहा कि इस फैसले के बाद भारत की रणनीतिक सोच और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को नई दिशा मिली। उन्होंने कहा कि आज भारत की विदेश नीति पहले की तुलना में अधिक मजबूत, आत्मविश्वासी और सम्मानजनक स्थिति में दिखाई देती है।
भागवत ने भी युवाओं से संवाद पर दिया था जोर
इससे पहले 25 जुलाई को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने भी नई पीढ़ी को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि आज के युवा हर विषय पर सवाल पूछते हैं, इसलिए उन्हें केवल आदेश देने के बजाय तर्क और संवाद के माध्यम से समझाना चाहिए। भागवत ने कहा था कि बातचीत और विचार-विमर्श के जरिए ही युवाओं को सही दिशा दी जा सकती है।
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