Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा की रात क्या करें और क्या नहीं? जानें पूजा के नियम और मान्यताएं

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन चंद्रमा की पूजा, धार्मिक अनुष्ठान और खीर बनाने जैसी परंपराएं कई घरों में निभाई जाती हैं। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ दिखाई देता है। इसी वजह से इस तिथि को पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना के लिए खास माना जाता है।

शरद पूर्णिमा 2026 पर क्या हैं धार्मिक मान्यताएं?

शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। कुछ परंपराओं में इस रात मां लक्ष्मी की पूजा और रात्रि जागरण का विधान बताया गया है। हालांकि, पूजा की विधि और परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों तथा परिवारों में भिन्न हो सकती हैं।

शरद पूर्णिमा की रात क्या करना शुभ माना जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन घर की साफ-सफाई करना, पूजा स्थल को व्यवस्थित रखना, श्रद्धापूर्वक मां लक्ष्मी और चंद्रमा की आराधना करना तथा जरूरतमंदों की सहायता करना शुभ माना जाता है। कई परिवारों में इस अवसर पर खीर बनाकर भगवान को भोग लगाया जाता है।

शरद पूर्णिमा पर किन बातों का रखें ध्यान?

पूजा के दौरान स्वच्छता, संयम और श्रद्धा का ध्यान रखने की परंपरा है। किसी भी धार्मिक नियम को लेकर भ्रम होने पर अपने परिवार की परंपरा या जानकार पुरोहित से सलाह ली जा सकती है। अलग-अलग पंचांगों में तिथि और पूजा के समय की पुष्टि करना भी जरूरी है।

ध्यान दें: 2026 में शरद पूर्णिमा की सही तारीख, तिथि आरंभ और समाप्ति का समय तथा पूजा का मुहूर्त स्थानीय पंचांग से सत्यापित करके ही प्रकाशित करें। धार्मिक मान्यताओं को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं करना चाहिए।

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