हूती विद्रोहियों के पास कहाँ से आ रहे हैं इतने ख़तरनाक हथियार? जानिए इसके पीछे का पूरा भू-राजनीतिक सच

मध्य-पूर्व (Middle East) की बदलती जियोपॉलिटिक्स में यमन के हूती विद्रोही (Houthis) अब किसी साधारण बागी गुट की तरह नहीं, बल्कि एक सक्षम सैन्य ताकत की तरह उभर चुके हैं। हाल ही में सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए मिसाइल हमलों ने दुनिया भर के डिफेंस एक्सपर्ट्स को हैरान कर दिया है।

एक तरफ जहां हूती विद्रोही सऊदी अरब के महत्वपूर्ण ठिकानों और ऑयल रिफाइनरियों को निशाना बना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ लाल सागर (Red Sea) और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट (Bab el-Mandeb Strait) जैसे बेहद अहम ग्लोबल शिपिंग रूट पर अपनी मजबूत पैਠ बना चुके हैं। लेकिन वॉशिंगटन से लेकर रियाद और तेल अवीव तक के वॉर-रूम में सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि संयुक्त राष्ट्र (UN) के साल 2015 से कड़े हथियार प्रतिबंधों (Arms Embargo) के बावजूद इस गुट के पास इतने अत्याधुनिक हथियार और मिसाइलें कहां से आ रही हैं?

1. ईरानी कनेक्शन और अवैध हथियारों की तस्करी

अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, हूती विद्रोहियों के हथियारों के जखीरे के पीछे सबसे बड़ा हाथ ईरान का माना जाता है।

  • स्मगलिंग नेटवर्क: ओमान की सीमा और अरब सागर के समुद्री मार्गों के जरिए ईरान से यमन तक छोटे जहाजों और बोट्स के माध्यम से हथियार, मिसाइल के पार्ट्स और ड्रोन के पूर्जे गुप्त रूप से पहुंचाए जाते हैं।

  • तकनीक का हस्तांतरण: रिपोर्ट्स बताती हैं कि ईरान ने सीधे तौर पर तैयार मिसाइलें देने के बजाय हूती लड़ाकों को खुद अपने बलबूते पर मिसाइलें और ड्रोन तैयार करने की तकनीक (Know-how) और असेंबली पार्ट्स मुहैया कराए हैं।

2. चीन के पुर्जे, आधुनिक तकनीक और AI का इस्तेमाल

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि हूती विद्रोहियों के पास अब केवल पारंपरिक हथियार नहीं हैं, बल्कि वे आधुनिक तकनीक से लैस क्रूज़ मिसाइलें और कामikaze ड्रोन इस्तेमाल कर रहे हैं।

  • कमर्शियल सप्लाई चेन: हथियारों के कई अहम इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे और ड्यूल-यूज टेक्नोलॉजी (Dual-use technology) ओपन मार्केट और ग्लोबल सप्लाई चेन के जरिए अवैध रूप से उन तक पहुंचती है, जिसमें चीन और अन्य देशों के कमर्शियल कंपोनेंट्स के इस्तेमाल की आशंका जताई जाती है।

  • लोकल मैन्युफैक्चरिंग: यमन के भीतर ही हूती गुट ने गुप्त ठिकानों पर हथियारों की असेंबली यूनिट्स स्थापित कर ली हैं, जहां ईरानी डिज़ाइन के आधार पर हथियारों को अंतिम रूप दिया जाता है।

3. संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों की नाकामी

साल 2015 से यूएन द्वारा यमन पर हथियारों का प्रतिबंध लगाया गया है, ताकि संघर्ष को रोका जा सके। हालांकि, निगरानी तंत्र की कमजोरियों, खुफिया नेटवर्क की सीमाओं और समुद्री सीमाओं की विशालता का फायदा उठाकर तस्कर आसानी से हथियारों की खेप हूती नियंत्रित क्षेत्रों तक पहुंचाने में कामयाब हो जाते हैं।

यमन के हूती विद्रोहियों का इस तरह अत्याधुनिक हथियारों से लैस होना वैश्विक व्यापार, तेल आपूर्ति और मध्य-पूर्व की सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन चुका है।

Check Also

मक्का की मस्जिद के अंदर ‘अनैतिक कृत्य’ करने पर सऊदी अरब का कड़ा एक्शन, दो बांग्लादेशी नागरिकों को दी गई फांसी

सऊदी अरब (Saudi Arabia) ने कानून-व्यवस्था और पवित्र स्थलों की मर्यादा को लेकर एक बार …