अमरीकी सरकार द्वारा एच-1बी (H-1B) वीजा के न्यूनतम वेतन में भारी बढ़ोतरी और परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) के अचानक निलंबन का असर अब सीधे तौर पर भारत के आईटी हब नोएडा में दिखाई देने लगा है। इस नए संकट के चलते नोएडा की छोटी-बड़ी कंपनियों में कार्यरत लगभग 3,000 कर्मचारियों की अमरीका ऑनसाइट पोस्टिंग (Onsite Posting) अधर में लटक गई है, जिन्हें इस साल दिसंबर तक अमरीका भेजा जाना था।
नोएडा के IT कॉरिडोर में छंटनी की सरगर्मियां तेज
औद्योगिक नगरी नोएडा में करीब 180 छोटी-बड़ी आईटी कंपनियां संचालित होती हैं, जिनमें 2 लाख से अधिक टेक प्रोफेशनल्स कार्यरत हैं। हर साल लगभग 45 से 50 हजार कर्मचारी ऑनसाइट प्रोजेक्ट्स के लिए अमरीका जाते हैं।
अमरीकी फैसलों से अमरीकी प्रोजेक्ट्स की संचालन लागत (Operating Cost) में 20 से 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की आशंका है। इस भारी बजटीय वित्तीय असंतुलन को संभालने के लिए नोएडा के सेक्टर-126, 132 और 135 स्थित दिग्गज आईटी कंपनियों (HCL, TCS, Infosys, Tech Mahindra, Cognizant) में अधिक वेतनभोगी वरिष्ठ कर्मचारियों (Senior Executives) की छंटनी की सरगर्मियां और डर का माहौल तेजी से बढ़ गया है।
1 लाख से अधिक ग्रीन कार्ड आवेदनों पर मंडराया संकट
अमरीकी श्रम विभाग द्वारा ‘पर्म’ (PERM) प्रक्रिया को निलंबित किए जाने से न केवल नए वीजा और पोस्टिंग पर रोक लगी है, बल्कि वर्ष 2009 से अब तक प्रक्रियाधीन 1 लाख से अधिक ग्रीन कार्ड आवेदनों का भविष्य भी अनिश्चितता के भंवर में फंस गया है। विदेश जाने के लिए फाइलें तैयार कर रहे युवा आईटी इंजीनियर्स के बीच अब अपने भविष्य और करियर ग्रोथ को लेकर भारी असमंजस बना हुआ है।
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