18वीं सदी की इस सूफी कविता पर बना था Madhuri Dixit का ‘मेरा पिया घर आया’

हिंदी सिनेमा की ‘धक-धक गर्ल’ माधुरी दीक्षित ने अपने करियर में एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर फिल्में और सदाबहार गाने दिए हैं। खासकर जब बात डांसिंग नंबर्स की आती है, तो 90 के दशक में माधुरी की अदाओं और स्टेप्स का कोई मुकाबला नहीं था। ऐसा ही एक आइकॉनिक गाना आज से ठीक 31 साल पहले पर्दे पर आया था, जिसने रिलीज होते ही धूम मचा दी थी। बेहद कम लोग जानते हैं कि हर शादी और पार्टी की शान बनने वाला माधुरी दीक्षित का यह कल्ट गीत असल में 18वीं सदी की एक मशहूर सूफी कविता से प्रेरित था।

साल 1995 की फिल्म ‘याराना’ का गाना ‘मेरा पिया घर आया’

साल 1995 में रिलीज हुई निर्देशक डेविड धवन की फिल्म ‘याराना’ (Yarana) में माधुरी दीक्षित, ऋषि कपूर और राज बब्बर मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। यूं तो फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर मिला-जुला प्रतिसाद मिला था, लेकिन इसका एक गाना इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। वो गाना था— ‘मेरा पिया घर आया’। इस गाने में माधुरी दीक्षित के बेमिसाल डांस स्टेप्स, ऊर्जा और भाव-भंगिमाओं ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया था।

बाबा बुल्ले शाह की 18वीं सदी की सूफी कलाम से प्रेरित थे बोल

‘मेरा पिया घर आया’ गीत के मूल शब्द 18वीं सदी के महान पंजाबी सूफी संत और कवि बाबा बुल्ले शाह की प्रसिद्ध कविता (कलाम) से लिए गए थे। बाबा बुल्ले शाह ने यह रचना अपने आध्यात्मिक गुरु (मुर्शिद) शाह इनायत के स्वागत और भक्ति भाव में लिखी थी। इसी आध्यात्मिक सूफी कलाम को 90 के दशक के मिजाज के मुताबिक रीमिक्स और मॉडर्नाइज करके फिल्म ‘याराना’ में शामिल किया गया था, जिसे अनु मलिक ने संगीतबद्ध किया था।

कविता कृष्णमूर्ति की जादुई आवाज ने बनाया अमर

इस डांस नंबर को अपनी सुरीली और दमदार आवाज से अमर बनाने का श्रेय दिग्गज गायिका कविता कृष्णमूर्ति को जाता है। कविता कृष्णमूर्ति की गायकी और माधुरी दीक्षित के स्क्रीन प्रेजेंस की जुगलबंदी ने इस गाने को भारतीय पॉप कल्चर का एक ऐसा लैंडमार्क बना दिया, जो तीन दशक बीत जाने के बाद भी उतना ही लोकप्रिय और तरोताजा महसूस होता है।

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