दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ डीके शिवकुमार की दहाड़, तो दूसरी ओर बेंगलुरु में एंटी-SIR प्रदर्शनकारियों पर पुलिस का कड़ा प्रहार

देश के राजनीतिक गलियारों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली को लेकर घमासान मचा हुआ है। एक तरफ जहां कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके अपने ही गृह राज्य यानी बेंगलुरु में पुलिस ने SIR के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर सख्त कार्रवाई करते हुए लगभग 100 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया है। इस विरोधाभासी घटना ने देश की सियासत में एक नया भूचाल ला दिया है।

दिल्ली में ईसीआई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की अगुवाई

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दिल्ली पहुंचकर चुनाव आयोग के कदमों और वोटर लिस्ट पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर तीखा विरोध दर्ज कराया है। कांग्रेस पार्टी और ‘इंडिया’ गठबंधन के अन्य नेताओं के साथ मिलकर डीके शिवकुमार ने लोकतंत्र की रक्षा और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। उनका साफ कहना है कि चुनाव आयोग की कार्यशैली से देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जिसके खिलाफ सड़कों से लेकर संसद तक आवाज उठाई जाएगी।

बेंगलुरु में एंटी-SIR प्रदर्शन पर पुलिस की सख्ती

एक तरफ जहां मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार दिल्ली में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और लोकतंत्र के अधिकारों की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बेंगलुरु में इसके उलट तस्वीर देखने को मिली। बेंगलुरु में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं, छात्रों और आम नागरिकों को पुलिस ने रोक दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के नाम पर पुलिस ने करीब 100 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया, जिसके बाद राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की दोहरी नीति पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

राजनीतिक गलियारों में दोहरे मापदंड को लेकर छिड़ी बहस

इस पूरी घटना के सामने आने के बाद विपक्षी दलों और आलोचकों ने कर्नाटक सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। सवाल यह उठाया जा रहा है कि जब दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करने की पूरी छूट है और इसे लोकतांत्रिक अधिकार बताया जा रहा है, तो फिर कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक में उसी मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे लोगों की आवाज को पुलिस के जरिए क्यों दबाया जा रहा है? बहरहाल, इस दोहरे रवैये को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है और आने वाले दिनों में यह एक बड़ा सियासी मुद्दा बन सकता है।

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