
वेदकों पर कसते शिकंजे के बीच भारत सरकार ने अमेरिकी प्रशासन के प्रति अब तक का सबसे तीखा और कड़ा रुख अपनाया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस (J.D. Vance) द्वारा भारतीय पेशेवरों को ‘बंधुआ’ (Indentured Servants) कहे जाने पर विदेश मंत्रालय (MEA) ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। भारत ने इस टिप्पणी को पूरी तरह से अनुचित, तथ्यहीन और गहरा अपमानजनक करार दिया है।
औपनिवेशिक मानसिकता वाली शब्दावली पर विदेश मंत्रालय का करारा प्रहार
विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति का यह वर्णन इस निर्विवाद तथ्य को पूरी तरह नजरअंदाज करता है कि अमेरिका में कार्यरत भारतीय पेशेवर अत्यधिक शिक्षित, कुशल और वहां के नवाचार (Innovation) तथा अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक योगदान दे रहे हैं।
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कड़े शब्दों में कहा:
“दर्दनाक ऐतिहासिक और औपनिवेशिक विरासत वाले अर्थ समेटे शब्दों (बंधुआ/Indentured) का सहारा लेना गहरा अपमानजनक है। अमेरिका का अपना इतिहास भी पीढ़ियों से प्रवासियों के श्रम, कौशल और उद्यम से बना है, जिन्होंने उसकी समृद्धि में अमूल्य योगदान दिया है।”
‘पर्म’ (PERM) प्रक्रिया से कंपनियों को बाहर करने पर भी जताई आपत्ति
भारत ने हाल ही में कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो जैसी प्रमुख आईटी कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणीकरण (PERM – Program Electronic Review Management) प्रक्रिया से बाहर करने के ट्रंप प्रशासन के फैसले पर भी सख्त ऐतराज जताया है। भारत ने स्पष्ट किया कि एच-1बी (H-1B) वीजा और ग्रीन कार्ड प्रक्रिया न केवल पारदर्शी तरीके से पूरी होती है, बल्कि यह खुद अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए बेहद फायदेमंद है।
भारत-अमेरिका कूटनीतिक संबंधों में बढ़ती तल्खी
हाल के दिनों में वीजा नियमों में बदलाव, न्यूनतम वेतन बढ़ाने का प्रस्ताव ($1.40 लाख डॉलर) और अब शीर्ष नेतृत्व द्वारा इस्तेमाल की गई विवादित शब्दावली के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में तल्खी साफ देखने को मिल रही है। नई दिल्ली की ओर से आई यह तीखी प्रतिक्रिया साफ संकेत देती है कि भारत अपने कुशल पेशेवरों के सम्मान और अधिकारों से कोई समझौता करने के मूड में नहीं है।
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