EC की सफाई पर कांग्रेस का तीखा पलटवार: जयराम रमेश बोले- ‘डैमेज कंट्रोल में जुटा आयोग, SIR प्रक्रिया पर तुरंत लगे रोक’

चुनाव आयोग (EC) द्वारा विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया पर जारी स्पष्टीकरण के बाद देश में राजनीतिक घमासान और तेज हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने आयोग के बयान को पूरी तरह से गोलमोल और खुद का बचाव करने की एक नाकाम कोशिश करार दिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तीखा हमला बोलते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर एकतरफा फैसले लेने और प्रत्यक्ष तौर पर ‘वोट चोरी’ में मदद करने जैसे बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग अब भारी गड़बड़ियों के बाद केवल डैमेज कंट्रोल में जुटा हुआ है, लेकिन देश के युवाओं और मतदाताओं से जुड़े मूलभूत सवालों से भाग रहा है।

जयराम रमेश का आयोग पर 6 सूत्रीय बड़ा हमला

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर आयोग के प्रेस नोट की धज्जियां उड़ाते हुए 6 प्रमुख बिंदु देश के सामने रखे। उन्होंने कहा कि आयोग के आधिकारिक बयान में कहीं भी गड़बड़ियों की रिपोर्ट का स्पष्ट खंडन नहीं किया गया है। गोवा का उदाहरण देते हुए उन्होंने उजागर किया कि वहां हटाए गए 97 मतदाताओं में से 81 के नाम वापस जोड़ना यह साफ साबित करता है कि आयोग की दोषपूर्ण व्यवस्था के कारण वैध नागरिकों को मताधिकार से वंचित किया जा रहा था। इसके अलावा, उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की आड़ लेकर अधिकारियों द्वारा मनमाने ढंग से नाम हटाने और नागरिकों को हुए नुकसान से पल्ला झाड़ने पर भी आयोग को आड़े हाथों लिया।

Gen Z वोटर्स की अनदेखी और राज्यों से पक्षपात का आरोप

कांग्रेस महासचिव ने राज्यों के बीच भेदभाव और युवा मतदाताओं की अनदेखी का गंभीर मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि दिल्ली और महाराष्ट्र के लिए मतदाता पंजीकरण की समय सीमा तो बढ़ा दी गई, लेकिन कर्नाटक, तेलंगाना, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के प्रभावित नागरिकों को यह राहत क्यों नहीं दी गई? इसके साथ ही उन्होंने नए फॉर्म 6 में बिना किसी संसदीय मंजूरी के किए गए अवैध बदलावों पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि आयोग ने यह नहीं बताया कि आखिर किस आधार पर पहली बार वोट देने जा रहे युवाओं (Gen Z) पर परिजनों के अनिवार्य विवरण देने का अनुचित दबाव डाला जा रहा है, जिससे युवा वोटर्स का पंजीकरण बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

पोर्टल के केंद्रीकरण से जमीनी स्तर पर बढ़ रही परेशानी

जयराम रमेश ने चुनाव आयोग द्वारा ECINET पोर्टल की आईआईटी/आईआईआईटी विशेषज्ञों से समीक्षा कराने के कदम को पूरी तरह से निरर्थक करार दिया। उन्होंने कहा कि असली समस्या पोर्टल की तकनीकी मजबूती या खामी नहीं है, बल्कि आयोग का अत्यधिक केंद्रीकरण है। इस केंद्रीयकृत व्यवस्था की वजह से जमीनी स्तर पर नए मतदाताओं का नाम जोड़ना और सुधार करना बेहद जटिल और बाधित हो गया है। कांग्रेस ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि इस पूरी दोषपूर्ण और संदेह के घेरे में आई विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाए और लोकतांत्रिक प्रणाली की पारदर्शिता बहाल की जाए।

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