हूती हों या तालिबान, विद्रोहियों की पहली पसंद क्यों बनी टोयोटा? यमन में सऊदी समर्थित सेना को दिया बड़ा झटका

यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित यमनी सरकार के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। लाल सागर के तट पर हूती लड़ाकों की तेजी से बढ़ती गतिविधियों ने क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। हाल के दिनों में हूती लड़ाकों ने यमन के पश्चिमी तट पर अहम इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत की है और रणनीतिक बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य की ओर बढ़त बनाई है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और चीज लगातार ध्यान खींचती है—विद्रोही लड़ाकों के काफिलों में नजर आने वाली टोयोटा की पिकअप गाड़ियां। यमन ही नहीं, अफगानिस्तान, सीरिया, इराक, लीबिया और अफ्रीका के कई संघर्षग्रस्त इलाकों में भी टोयोटा हिलक्स और लैंड क्रूजर जैसे वाहन सशस्त्र गुटों के बीच लंबे समय से लोकप्रिय रहे हैं। यही वजह है कि सैन्य विश्लेषकों ने कभी-कभी टोयोटा हिलक्स को विद्रोही युद्ध का ‘चलता-फिरता हथियार’ तक बताया है।

आखिर टोयोटा ही क्यों पसंद करते हैं विद्रोही गुट?

इसकी सबसे बड़ी वजह इन गाड़ियों की मजबूती और भरोसेमंद प्रदर्शन माना जाता है। युद्धग्रस्त इलाकों में जहां पक्की सड़कें कम होती हैं, वहां पिकअप ट्रक मुश्किल रास्तों, रेगिस्तानी इलाकों और खराब परिस्थितियों में भी काम आ सकता है। टोयोटा हिलक्स और लैंड क्रूजर की विश्वसनीयता तथा आसान रखरखाव की वजह से इनका इस्तेमाल गैर-पारंपरिक सैन्य वाहनों के तौर पर भी किया जाता रहा है।

इन वाहनों का एक और फायदा इनका बहुउपयोगी होना है। सामान्य पिकअप को स्थानीय जरूरत के मुताबिक अलग-अलग कामों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। यही कारण है कि दुनिया के कई संघर्ष क्षेत्रों में इन्हें ‘टेक्निकल’ नाम से जाने जाने वाले हथियारबंद वाहनों के रूप में देखा गया है।

टोयोटा की कहानी सिर्फ हूतियों तक सीमित नहीं

विद्रोही गुटों के साथ टोयोटा वाहनों की तस्वीर कोई नई बात नहीं है। तालिबान से लेकर इस्लामिक स्टेट और अन्य सशस्त्र गुटों तक, अलग-अलग संघर्षों में टोयोटा के पिकअप और लैंड क्रूजर दिखाई देते रहे हैं। 2015 में इस्लामिक स्टेट के प्रचार वीडियो में बड़ी संख्या में टोयोटा पिकअप नजर आने के बाद अमेरिका में भी यह सवाल उठा था कि आखिर ये वाहन आतंकी संगठन तक पहुंचे कैसे।

टोयोटा हिलक्स का सैन्य इतिहास इससे भी पुराना है। 1980 के दशक में चाड और लीबिया के बीच संघर्ष के दौरान पिकअप ट्रकों के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के कारण उस लड़ाई को अनौपचारिक रूप से ‘टोयोटा वॉर’ के नाम से जाना गया।

यमन में क्यों बढ़ी चिंता?

यमन का मौजूदा संघर्ष इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि लड़ाई का केंद्र लाल सागर के आसपास का इलाका बनता जा रहा है। हूतियों की हालिया बढ़त ने उन्हें बाब-अल-मंदेब के करीब ला दिया है। यह जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद अहम मार्ग माना जाता है।

रॉयटर्स के मुताबिक हूती बलों की पश्चिमी तट पर तेजी से हुई बढ़त ने उन्हें बाब-अल-मंदेब के रणनीतिक इलाके में महत्वपूर्ण स्थिति में पहुंचा दिया है। इस क्षेत्र पर नियंत्रण या यहां सैन्य दबाव बढ़ने का सीधा असर तेल और दूसरे सामान की समुद्री आवाजाही पर पड़ सकता है।

सऊदी समर्थित सेना के सामने बढ़ी चुनौती

हूतियों की बढ़त ने सऊदी समर्थित यमनी सरकार के सामने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालिया संघर्ष में सरकारी बलों को कई इलाकों में पीछे हटना पड़ा है और हूती लड़ाकों ने लाल सागर के तटीय क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत की है। इसी दौरान सऊदी अरब की ओर से हूती ठिकानों पर हवाई हमले किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं।

यानी जमीन पर लड़ाई सिर्फ दो यमनी गुटों के बीच नहीं रह गई है। इसके पीछे ईरान और सऊदी अरब की क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता, लाल सागर की सुरक्षा और वैश्विक व्यापार मार्गों की चिंता भी जुड़ गई है।

पिकअप ट्रक कैसे बन जाते हैं ‘टेक्निकल’?

युद्धक्षेत्र में सामान्य पिकअप को हथियारबंद वाहन में बदला जा सकता है। ऐसे वाहनों को आमतौर पर ‘टेक्निकल’ कहा जाता है। इनकी खासियत यह है कि ये भारी सैन्य टैंकों या बख्तरबंद गाड़ियों की तुलना में हल्के, अपेक्षाकृत तेज और अलग-अलग इलाकों में आसानी से चलने वाले होते हैं। टोयोटा हिलक्स और लैंड क्रूजर की विश्वसनीयता ने इन्हें ऐसे संघर्षों में खास पहचान दिलाई है।

हालांकि यह समझना जरूरी है कि किसी संघर्ष में टोयोटा की मौजूदगी का मतलब यह नहीं होता कि वाहन निर्माता कंपनी किसी विद्रोही संगठन को समर्थन दे रही है। 2015 में आई खबरों में भी इस बात पर सवाल उठा था कि इस्लामिक स्टेट के पास बड़ी संख्या में टोयोटा वाहन आखिर किन रास्तों से पहुंचे। हालिया सैन्य बढ़त को अमेरिका, सऊदी अरब और दूसरे क्षेत्रीय देशों के लिए भी गंभीर रणनीतिक चुनौती माना जा रहा है।

हूतियों की बढ़त का असर सिर्फ यमन तक नहीं

यमन में जारी लड़ाई का असर अब क्षेत्रीय सीमाओं से आगे बढ़कर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजारों तक पहुंच रहा है। बाब-अल-मंदेब के आसपास तनाव बढ़ने से लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा पर सवाल उठते हैं। इसी वजह से हूतियों की हालिया सैन्य बढ़त को अमेरिका, सऊदी अरब और दूसरे क्षेत्रीय देशों के लिए भी गंभीर रणनीतिक चुनौती माना जा रहा है।

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