चुनाव आयोग के भीतर से ही मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (SSR) में उजागर हुई गंभीर खामियों ने देश की सियासत में भूचाल ला दिया है। निष्पक्ष चुनाव प्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पूरी तरह से घिर गए हैं। इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने उनके खिलाफ चौतरफा मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने के लिए संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने से लेकर सड़कों पर बड़ा जनांदोलन खड़ा करने का पूरा खाका तैयार कर लिया है।
25 और 28 सितंबर को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट का घेराव
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मामले पर आक्रामक रुख अपनाते हुए चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा कर दी है। पार्टी रणनीति के तहत 25 सितंबर (शुक्रवार) को देश के सभी राज्यों की राजधानियों में स्थित राज्य चुनाव आयोग के कार्यालयों तक विशाल विरोध मार्च निकाला जाएगा। इस प्रदर्शन के जरिए ज्ञानेश कुमार को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त करने और उन पर कानूनी कार्रवाई की मांग की जाएगी। इसके बाद आंदोलन को जिला स्तर पर ले जाते हुए 28 सितंबर को सभी जिलों में कलेक्ट्रेट कार्यालयों का घेराव करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
29 सितंबर को CWC की इमरजेंसी बैठक, महाभियोग पर लगेगी मुहर
सीईसी और केंद्र सरकार पर राजनीतिक दबाव को और बढ़ाने के लिए कांग्रेस अपनी शीर्ष नीति-निर्माता इकाई कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की 29 सितंबर को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाने जा रही है। इस बैठक में महाभियोग प्रस्ताव की कानूनी और संसदीय बारीकियों पर चर्चा की जाएगी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर लोकतंत्र बचाने की लड़ाई के रूप में पेश करने की योजना बना रहा है।
केसी वेणुगोपाल का तीखा हमला: ‘वोट चोरी के लिए ज्ञानेश कुमार हों गिरफ्तार’
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी के प्रभाव में काम कर रहे सीईसी ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े और ‘वोट चोरी’ का खेल खेला गया है। अब जब आयोग के अंदर से ही इन गड़बड़ियों का भंडाफोड़ हो चुका है, तो यह स्पष्ट है कि यह लोकतंत्र के खिलाफ एक गंभीर देश-विरोधी कृत्य है। वेणुगोपाल ने मांग की कि ज्ञानेश कुमार को सिर्फ पद से हटाना काफी नहीं है, बल्कि उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
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