
नई दिल्ली/जोधपुर: भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग अब आसमान में एक नए स्तर पर पहुंचने जा रहा है। जापान के एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स यानी JASDF के लड़ाकू विमान पहली बार भारतीय धरती पर पहुंचेंगे। राजस्थान के जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर होने वाले भारत-जापान के संयुक्त हवाई अभ्यास ‘वीर गार्जियन 2026’ में जापान के F-2A लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना के Su-30MKI के साथ युद्धाभ्यास करेंगे। जापान के लिए यह तैनाती इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे पहले दोनों देशों के लड़ाकू विमानों का संयुक्त अभ्यास जापान में हुआ था, लेकिन पहली बार जापानी फाइटर जेट भारत आकर इस अभ्यास में हिस्सा लेंगे।
9 से 21 सितंबर तक जोधपुर में दिखेगा भारत-जापान का दम
‘वीर गार्जियन 26’ का आयोजन 9 सितंबर से 21 सितंबर 2026 तक जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन और आसपास के हवाई क्षेत्र में किया जाएगा। जापानी रक्षा बलों की तैनाती की पूरी अवधि यात्रा समेत 1 सितंबर से 30 सितंबर तक बताई गई है। इस दौरान जापान की ओर से करीब 110 सैन्यकर्मी अभ्यास में शामिल होंगे।
जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स अपनी 8वीं एयर विंग के तीन F-2A लड़ाकू विमानों को भारत भेज रही है। अभ्यास का मुख्य फोकस लड़ाकू विमानों के बीच हवाई युद्ध प्रशिक्षण रहेगा। इससे दोनों देशों के पायलटों को एक-दूसरे की ऑपरेशनल रणनीति, युद्धकौशल और हवाई अभियानों की कार्यप्रणाली को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।
Su-30MKI और F-2A की जोड़ी क्यों है खास?
भारतीय वायुसेना के Su-30MKI और जापान के F-2A अलग-अलग तकनीकी जरूरतों और ऑपरेशनल भूमिकाओं के लिए विकसित किए गए हैं। ऐसे में दोनों विमानों के बीच संयुक्त हवाई अभ्यास केवल शक्ति प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि पायलटों के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म के खिलाफ और साथ में ऑपरेशन करने की व्यावहारिक ट्रेनिंग भी है।
भारत के पास Su-30MKI वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमानों में शामिल है। दूसरी ओर, जापान का F-2 अमेरिकी F-16 से विकसित डिजाइन पर आधारित जापानी लड़ाकू विमान है, जिसे जापान की जरूरतों के मुताबिक बड़े पैमाने पर संशोधित किया गया है। दोनों विमानों का एक साथ अभ्यास भारत और जापान के बीच बढ़ती सैन्य इंटरऑपरेबिलिटी का संकेत माना जा रहा है।
तीन साल पहले जापान में हुआ था पहला अभ्यास
भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय लड़ाकू विमान अभ्यास की शुरुआत जनवरी 2023 में हुई थी। उस समय भारतीय वायुसेना ने चार Su-30MKI, दो C-17 परिवहन विमान और एक IL-78 एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर जापान भेजा था। जापान की ओर से चार F-2 और चार F-15 लड़ाकू विमान शामिल हुए थे।
2023 के अभ्यास में दोनों देशों की वायु सेनाओं ने जटिल परिस्थितियों में बहु-आयामी हवाई युद्ध अभियानों और विभिन्न ऑपरेशनल प्रक्रियाओं पर प्रशिक्षण किया था। अब तीन साल बाद अभ्यास की दिशा बदल गई है और जापानी लड़ाकू विमान भारत आ रहे हैं।
पहली बार भारतीय जमीन पर उतरेंगे जापानी फाइटर जेट
भारत के लिए इस अभ्यास की सबसे बड़ी खासियत यही है कि JASDF के लड़ाकू विमान पहली बार भारत में किसी द्विपक्षीय हवाई अभ्यास में हिस्सा लेंगे। जापान के रक्षा मंत्रालय ने भी इसे दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने वाले कदम के रूप में रेखांकित किया है। अगस्त 2026 में भारत-जापान रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान दोनों देशों ने ‘वीर गार्जियन’ के लिए जापानी एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स के लड़ाकू विमानों की भारत यात्रा का विशेष तौर पर स्वागत किया था।
इससे भारत-जापान के सैन्य संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ता है। दोनों देशों की सेनाएं पहले से ही थल, नौसेना और वायुसेना स्तर पर अलग-अलग अभ्यास करती रही हैं। रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों पक्ष सैन्य अभ्यासों को अधिक जटिल बनाने, मानवरहित प्रणालियों को शामिल करने और जरूरत पड़ने पर कम समय में संयुक्त अभ्यास करने की संभावनाओं पर भी काम कर रहे हैं।
चीन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम?
भारत और जापान दोनों ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर रणनीतिक रूप से सतर्क रहे हैं। ऐसे समय में दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच बढ़ता सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। हालांकि ‘वीर गार्जियन 26’ एक द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास है और इसे आधिकारिक तौर पर किसी तीसरे देश के खिलाफ अभ्यास नहीं बताया गया है, लेकिन भारत-जापान की बढ़ती रक्षा साझेदारी का व्यापक असर हिंद-प्रशांत क्षेत्र की रणनीतिक तस्वीर पर पड़ सकता है।
जापान और भारत दोनों ही ‘फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक’ की अवधारणा के तहत रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। अगस्त 2026 की भारत-जापान रक्षा मंत्रिस्तरीय बैठक में दोनों देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर आकलन साझा करने और रक्षा सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई थी।
भारत-जापान की बढ़ती सैन्य साझेदारी
भारत और जापान के रक्षा संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच थलसेना का ‘धर्म गार्जियन’, नौसेना का ‘JAIMEX’ और वायुसेना का ‘वीर गार्जियन’ जैसे अभ्यास होते हैं। जापान की नौसेना भारत में आयोजित बहुपक्षीय सैन्य अभ्यासों में भी हिस्सा ले चुकी है।
जापान की ओर से भारतीय वायुसेना के Su-30MKI पायलटों के साथ भी प्रशिक्षण और पायलट एक्सचेंज किया गया है। नवंबर 2025 में भारतीय वायुसेना के Su-30MKI पायलटों ने जापान के कोमात्सु एयर बेस का दौरा किया था और JASDF के F-15 विमान में परिचयात्मक उड़ान का अनुभव लिया था।
अब आसमान में साथ दिखेंगे F-2A और Su-30MKI
‘वीर गार्जियन 26’ भारत और जापान के रक्षा संबंधों में सिर्फ एक और सैन्य अभ्यास नहीं है। पहली बार जापानी लड़ाकू विमानों का भारत आना दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक भरोसे और वायुसेना स्तर पर सहयोग के विस्तार को दिखाता है। जोधपुर के आसमान में जापान के F-2A और भारत के Su-30MKI की संयुक्त ट्रेनिंग आने वाले दिनों में क्षेत्रीय सुरक्षा और भारत-जापान रक्षा साझेदारी के लिहाज से खास घटनाक्रम रहने वाली है।
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