छात्रों की गूंज पर सियासी घमासान: PM मोदी की मिमिक्री से भड़की BJP, रिजिजू बोले- कांग्रेस जोकरों की पार्टी बनी

नई दिल्ली/इंदौर। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री और मंच से हुई टिप्पणियों के बाद भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। भाजपा ने आरोप लगाया कि छात्र संवाद के मंच का इस्तेमाल प्रधानमंत्री मोदी की दिवंगत मां के अपमान के लिए किया गया। वहीं कांग्रेस ने भाजपा और आरएसएस पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए और राहुल गांधी के कार्यक्रम का बचाव किया।

PM मोदी की मिमिक्री पर शुरू हुआ विवाद

इंदौर में शनिवार को हुए ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शिक्षा, रोजगार, भर्ती, परीक्षा, आरक्षण और छात्रों से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा हुई। कार्यक्रम के दौरान स्टैंडअप कॉमेडियन पुलकित मणि भी मंच पर पहुंचे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बोलने और विदेशी नेताओं से मुलाकात के अंदाज की मिमिक्री की। इसी दौरान राहुल गांधी भी हंसते नजर आए। कार्यक्रम का यह हिस्सा सामने आने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में विवाद तेज हो गया।

भाजपा ने लगाए PM की मां के अपमान के आरोप

भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत मां को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की गई। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इसे लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि छात्र संवाद के मंच का इस्तेमाल प्रधानमंत्री की दिवंगत मां का मजाक उड़ाने और अपमान करने के लिए किया गया, जिसे उन्होंने राजनीतिक संस्कृति और मानवीय संवेदना से जुड़ा गंभीर मामला बताया।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस विवाद को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कांग्रेस को ‘कॉमेडियंस और जोकर्स की पार्टी’ बताया। रिजिजू की इस टिप्पणी के बाद भाजपा-कांग्रेस के बीच बयानबाजी और तेज हो गई।

छात्रों के मुद्दों पर राहुल गांधी ने सरकार को घेरा

‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का मुख्य फोकस छात्रों की समस्याओं पर था। इंदौर में विद्यार्थियों ने शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं, भर्ती में देरी, पेपर लीक, आरक्षण, हॉस्टल और रोजगार से जुड़े सवाल राहुल गांधी के सामने रखे। कार्यक्रम का विषय ‘सिस्टम बनाम स्टूडेंट्स’ रखा गया था।

राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्रों को पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और बेहतर अवसर मिलना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक से प्रभावित अभ्यर्थियों की चिंताएं भी सामने आईं।

कांग्रेस ने भी भाजपा पर किया पलटवार

विवाद बढ़ने के बाद कांग्रेस राहुल गांधी के बचाव में उतर आई। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि राहुल गांधी छात्रों के साथ खड़े हैं और कार्यक्रम में युवाओं ने शिक्षा, भर्ती और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल उठाए। कांग्रेस ने भाजपा और आरएसएस पर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर और भ्रष्ट करने के आरोप भी लगाए। कांग्रेस का कहना है कि ‘छात्रों की गूंज’ का उद्देश्य युवाओं की समस्याओं को सामने लाना और उनसे सीधे संवाद करना था। पार्टी ने भाजपा के आरोपों को राजनीतिक हमला बताते हुए शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा को केंद्र में रखने की बात कही।

धर्मेंद्र प्रधान ने भी राहुल गांधी पर साधा निशाना

कार्यक्रम के बाद भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी राहुल गांधी पर हमला बोला। उन्होंने ‘सिस्टम बनाम छात्र’ को राहुल गांधी का राजनीतिक नैरेटिव बताते हुए कहा कि छात्रों को राजनीतिक प्रदर्शन के बजाय अपनी समस्याओं के जवाब चाहिए। प्रधान ने उच्च शिक्षा, सरकारी योजनाओं और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार की नीतियों का बचाव किया।

पहले भी कई शहरों में हो चुका है ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम

राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम इंदौर से पहले कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में भी आयोजित किया जा चुका है। इन कार्यक्रमों में शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, बेरोजगारी और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर संवाद किया गया है। इंदौर के कार्यक्रम के बाद हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री और उससे जुड़ी टिप्पणियों ने पूरे आयोजन को राजनीतिक विवाद के केंद्र में ला दिया है।

फिलहाल ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी है। एक तरफ भाजपा ने मंच पर हुई मिमिक्री और प्रधानमंत्री की दिवंगत मां से जुड़ी टिप्पणी को मुद्दा बनाया है, वहीं कांग्रेस शिक्षा, रोजगार और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को प्रमुखता दे रही है। इस विवाद के बीच इंदौर का यह कार्यक्रम राजनीतिक बयानबाजी का नया केंद्र बन गया है।

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